पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम के साथ सफाई अभियान की शुरूआत करायी जाए तो बने बात,
मेरठ। शहर के ज्यादातर नालों की पटरियों पर लोगों ने पक्के कब्जे कर लिए हैं। ऐसे में नालों की तल्लीझाड़ सफाई का दावा और उम्मीद दोनों ही करना बेमाने होगा। नालों की पटरियों पर कब्जों की हालत इतनी ज्यादा गंभीर है कि आरटीओ वाले नाले की यदि बात करें तो वहां पर पक्के निर्माण कर लिए हैं। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने खुद मौके पर जाकर इसका मुआयना भी किया। मानसून आने में अब मुश्किल से बीस दिन का समय बाकि रह गया बताया जा रहा है। ऐसे में यदि नालों की समुचित सफाई नहीं करायी जाती तो शहर में फिर एक बार फिर पिछले साल सरीखे हालात बनेंगे। लेकिन नगर निगम के अफसरों के लिए नालों की पटरी को कब्जा मुक्त कराना आसान नहीं है। यदि कार्रवाई की जाती है तो कानून व्यवस्था का संकट खड़ा होने की आशंका है। यह स्थित केवल आरटीओ वाले नाले की नहीं है शहर में खासतौर से घनी आबादी वाले इलाकों में नालों की ऐसी ही स्थिति बन गयी है। नालों की सफाई की बात पुरजोर तरीके से उठाने वालों का कहना है कि यह काम केवल नगर निगम अफसरों पर छोड़ दिया जाना तो नाइंसाफी होगी। इसके लिए संयुक्त अभियान चलाया जाए। जिसमें प्रशासन यानि मजिस्ट्रेट, पुलिस, मेरठ विकास प्राधिकरण, पीवीवीएनएल और पीडब्लूडी को भी शामिल किया जाए। संयुक्त अभियान भी ऐसा होना चाहिए जो दिन रात की परवाह किए बगैर चलवाया जाए। तभी शहर के नालों की तल्लीझाड़ सफाई संभव है। क्योंकि तल्लीझाड़ सफाई के लिए जरूरी है कि पहले नालों की पटरी पर किए गए अवैध कब्जे हटवाए जाएं। यह काम केवल नगर निगम के भरोसे यदि बैठे रह गए तो नहीं होने वाला है। इस कार्य में प्रशासन और पुलिस का सहयोग निश्चित रूप से चाहिए तभी नाले साफ हो सकते हैं।
शहर के नालों को कब्जों से मुक्त रखने और उनकी साफ-सफाई के मद्देनजर पूर्व में नगर निगम बोर्ड ने नालों की पटरियों पर रास्ते बनाए का प्रस्ताव पास किया था। रालोद नेता व पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार बताते हैं कि प्रस्ताव पर पूरे बोर्ड की सहमति थी। उनका कहना है नालों की पटरियों को कब्जों से मुक्त कराने के प्रस्ताव पर यदि नगर निगम के अफसरों ने काम कर लिया होता तो शायद आज जो हालात बन गए हैं वो शायद नहीं बनते। अब तो हालत यह है कि कई जगह नालों की पटरियों पर पक्के लेंटर डाल दिए गए हैं। बीस से पच्चीस फुट तक कब्जे कर लिए गए हैं। हालत कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो मशीनें नालों की सफाई में प्रयुक्त की जानी हैं उनके जाने का रास्ता तक नहीं बाकि रह गया है। जब मशीन के नाले के पास तक पहुंंचने का रास्ता ही कब्जा करने वाले लोगों ने नहीं छोड़ा है तो ना तो मशीन नाले के पास तक पहुंच सकेगी ना ही वहां सफाई हो सकेगी।
नालों की सफाई का काम शुरू
नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि पूरे महानगर में नालों की सफाई का काम शुरू करा दिया गया है। वह स्वयं सफाई कार्य की निगरानी कर रहे हैं। नाला-नाली गैंग बना दिया गया है। ओडियन नाले से शुरुआत हो गई है। कसेरूखेड़ा नाला, आबूनाला, दिल्ली रोड नाले सहित सभी बड़े नालों की सफाई मशीनों से रात में की जाएगी। बच्चा पार्क,ईदगाह, मनसबिया, इंदिरा चौक की भूमिगत नाले की क्रासिंग की सफाई कराई जा चुकी है। अत्यधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में जैसे डिफेंस कॉलोनी, जिमखाना, लेडीज पार्क, माधवपुरम, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कराए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नाला-नाली सफाई की निगरानी और उसे सुनिश्चित कराने के लिए अधिकारियों की क्षेत्र वार ड्यूटी सोमवार से लग जाएगी।
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