नई दिल्ली। पेपर लीक और फिर युवाओं पर पुलिस की बर्बरता को लेकर राहुल गांधी के विरोध के बाद केंद्र की मोदी सरकार विपक्ष से डरी हुई नजर आ रही है। सरकार का रवैया बैकफुट वाला है। हालिया संसद सत्र और दिल्ली में ‘कांग्रेस जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में युवाओं के विशाल विरोध प्रदर्शनों (नीट पेपर लीक और बेरोजगारी) के कारण मोदी सरकार विपक्ष और जनता के दबाव में बैकफुट पर दिखाई दे रही है। बढ़ते दबाव के कारण प्रधानमंत्री मोदी को हस्तक्षेप करना पड़ा है और सभी पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन जैसे कदम उठाने पड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए हैं, जबकि विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत करार दिया है।
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सीधे पीएम मोदी पर हमला बोल दिया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज को लेकर मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे साढ़े 7 करोड़ से अधिक युवा प्रभावित हुए हैं। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शिक्षा तंत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया और कहा कि पूरा सिस्टम “खोखला” हो चुका है।
लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लगातार छात्रों के आंदोलन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक के मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है, जिससे विधाई कामकाज प्रभावित हो रहा है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव सरीखों द्वारा गिरफ्तारी दिए जाने के बाद सरकार मुश्किल में नजर आ रही है। राहुल गांधी जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच जाकर उन्हें सीधा समर्थन दिया है, जिससे सरकार की राजनीतिक चुनौती बढ़ गई है।
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