नई दिल्ली। जंतर मंतर पर बीस जुलाई को छात्र-छात्राओं पर पुलिसिया बर्बरता को लेकर केवल युवा ही नहीं बल्कि सभी वर्ग के लोगों और खासकर महिलाओं में गुस्सा थमता नजर नहीं आ रहा है। युवाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसका मुख्य कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग है। देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र और युवा इस आंदोलन में भाग लेने के लिए लगातार पहुंच रहे हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश भर से जतंर मंतर पर पहुंचने की होड़ मची हुई है। जो लोग जंतर मंतर पहुंच रहे हैं उनका कहना है कि जो मोदी सरकार की पुलिस की जुर्म के जो वीडियो सोशल मीडिया पर उन्होंने देखे उसके बाद फिर रुका नहीं गया और सीधे जंतर-मंतर के लिए गांव और घर से रवाना हो गए। जंतर-मंतर पर प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जारी प्रदर्शन शुक्रवार को सातवें सप्ताह में प्रवेश कर गया। छात्रों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब अप्रत्याशित रूप से वरिष्ठ नागरिकों का भी समर्थन हासिल कर रहा है जिनका कहना है कि वे इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुए हैं क्योंकि यह मुद्दा देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। जंतर मंतर पर डेरा डाले सैकड़ों ‘जेन-जेडÓ प्रदर्शनकारियों के बीच 50, 60 और यहां तक कि 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी छात्रों के साथ बैठे, नारे लगाते, बैठकों में हिस्सा लेते और सरकारी परीक्षाओं में सुधार की मांग का समर्थन करते दिखाई दिए। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी है और कई ऐसे भी लोग पहुंच हैं जो अपने पूरे परिवार को लेकर आए हैं।
पुलिस को लेकर गुस्सा
जंतर मंतर पर मौजूद तमाम ऐसी महिलाएं मिलीं जो पुलिस के रवैये से सबसे ज्यादा नाराज दिखाई दीं। तमाम महिलाएं पुलिस के अफसरों से भिड़ गयीं। उनके सवालों के जवाब पुलिस के किसी अधिकारी के पास नहीं थे। वो पूछ रहीं थी कि क्या उनके परिवारों में बहन बेटियां नहीं है। क्या पेपर लीक से उनके परिवार के बच्चों का भविष्य अंधकारमय नहीं हो रहा है। जब वो बच्चियों पर लाठी चला रहे थे तब क्यों नहीं उन्हें अपने परिवार की बेटियों व बहनों की याद आयी। सवाल वाकई बेहद कड़वे थे। इन सवालों से पुलिस के अफसर और मौके पर मौजूद जवाब भागते नजर आए। वो इन सवालों का सामना नहीं कर पा रहे थे। हालत यह हो गई कि अब ये सवाल जंतर मंतर पर मौजूद पुलिस अफसरों को भी परेशान करने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ के गोमती नगर पेपर मिल कालोनी से आए से आए 64 वर्षीय प्रदीप रस्तौगी ने बताया कि वह लगभग 30 लोगों के समूह के साथ करीब 12 घंटे की यात्रा कर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। उन्होंने बताया कि , ‘हम यहां आज के लिए नहीं आए हैं; हम इस देश के भविष्य के लिए आए हैं। ये युवा बच्चे ही हमारा भविष्य हैं। जब मेरे पोते-पोतियां मुझसे पूछेंगे कि जब युवा शिक्षा में सुधार लाने की कोशिश कर रहे थे, तब मैं क्या कर रहा था, तो मैं उन्हें क्या मुंह दिखाऊंगा?Ó साठ वर्ष से अधिक आयु की मुस्लिम महिला आयशा कहती हैं कि देशभर में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं की खबरों ने उन्हें इस आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने ज्यादा पढ़ाई-लिखाई नहीं की है, लेकिन मैं जानती हूं कि शिक्षा जिंदगी की सबसे जरूरी चीजों में से एक है, बल्कि शायद सबसे जरूरी चीज है। लगभग 20 छात्रों की मौत हो चुकी है; कल यह संख्या काफी बढ़ सकती है। इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?
जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन जून की शुरुआत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) और कई छात्र संगठनों के बैनर तले शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी कथित ‘नीट-यूजी 2026Ó प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे सरकारी परीक्षाओं के संचालन में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं। गोवा पण्जी से आए 58 वर्षीय जेम्स ने कहा कि यह आंदोलन उन्हें देश के कुछ बड़े जन आंदोलनों की याद दिलाता है। उन्होंने बताया, ”मैं 1990 में मंडल आयोग आंदोलन में शामिल हुआ था। 2011 में ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शनÓ आंदोलन के लिए दिल्ली आया था। यह आंदोलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है।ÓÓ उन्होंने बेहर दिलचस्प बात कही, वो बोले कि उन्होंने ना तो गांधी जी को देखा और ना ही उनका आंदोलन, लेकिन जो कुछ जंतर मंतर पर बीस जुलाई को हुआ शायद वैसा ही गोरी सरकार की हुकूमत में क्रांतिकारियों के साथ होता होगा।
जंतर मंतर पर तमाम संगठनों से जुड़े लोग मिले। इनमें किसान, सरकारी कर्मचारी, पूर्व आईपीएस व आईएएस अफसर, धर्म संस्थाओं से जुड़े लोग। इंडियन आर्मी के लोगों के अलावा जंतर मंतर पर जमा युवा प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वरिष्ठ लोगों की भागीदारी ने इस आंदोलन को नया स्वरूप दिया है। इक्कीस वर्षीय निकिता ने बताया कि 20 जुलाई से प्रदर्शन स्थल पर अपने भाई व कालेज के सहपाठियों के साथ रह रही हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के समर्थन से छात्रों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा, ”कल मैंने 60 और 70 वर्ष की उम्र की कई महिलाओं को एक साथ बैठकर प्रदर्शन में भाग लेते देखा। वह बेहद सुंदर दृश्य था। कोरोना महामारी के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि समाज के हर वर्ग के लोग एक साझा मुद्दे पर एकजुट हुए हैं। तमाम ऐसे लोग मिले जो बताते हैं कि उन्होंने जंतर मंतर पर फिल्मी हस्तियों व समाज के दूसरे सेलिब्रेटीज को भी देखा है।
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