नई दिल्ली। आखिरकार मोदी सरकार काे देश के करोड़ों युवाओं के सामने झुकना ही पड़ा। पेपर लीक मामलों के चलते चारों ओर से हो रही फजीहत व थू-थू के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे ही दिया। सीजेपी के आंदोलनकारियों पर पुलिसिया बर्बरता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में पीएम हाउस को घेरने के बाद मोदी सरकार दवाब में साफ नजर आती थी। उसी की परिणिति आज प्रधान के इस्तीफे के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि यह इतना आसान नहीं था। इसके लिए देश के युवाओं को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। इस्तीफा देने वाले धर्मेन्द्र प्रधान ने लिखा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।
एक्स से इस्तीफे की जानकारी
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करता हूं।
3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया। इस्तीफा के बाद एक लंबा चौड़ा बयान भी उन्होंने लिखा है जिसमें कहा गया है कि इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई। पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
नीट यूजी परीक्षा परिणाम को बताया संतोषजनक
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूं। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।
जंतर मंतर पर डटे हैं लाखों युवा
इस्तीफे की खबर आने के बाद भी जंतर मंतर पर लाखों युवा डटे हैं। दरअसल सीजेपी प्रतिनिधि मंडल और मोदी सरकार के नुमाइंदों के बीच होने वाली बैठक में क्या निकलकर आता है संभवत इसका ही इंतजार किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर युवा यह भी चाहते है कि आंदोलन के दौरान जो मुदकमें दर्ज किए गए हैं वो भी खत्म किए जाने चाहिए।
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