नई दिल्ली। सीजफायर टूटने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेना द्वारा लगातार कई रातों तक ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर बमबारी (एयर स्ट्राइक) की गई है। इसके जवाब में ईरान ने उसने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से पलटवार किया है। ईरानी मिसाइलों के हमले में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुनिया के युद्ध विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमले शुरू कर मुसीबत मोल ले ली है। क्योंकि ईरान को चीन व उत्तरी कोरिया और रूस की भरपूर लेकिन अंदरूनी मदद मिल रही है। अमेरिका कभी भी ईरान पर फतह हासिल नहीं कर पाएगा।
ईरान के ताजा हमले
ईरानी सेना (IRGC) के अनुसार, उन्होंने जॉर्डन के अज़रक और बहरीन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों में कम से कम 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और लगभग 500 सैनिक घायल हुए हैं। की रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन और इराक में हुए हमलों में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और अकेले जुलाई महीने के हालिया हमलों में ही करीब 100 से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं। कई सैनिकों को ‘ब्रेन कंकशन’ (दिमागी चोट) आई है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के हमलों में बहरीन स्थित अली अल सालेम एयरबेस के एयर डिफेंस रडार और अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टरों को भारी नुकसान पहुँचा है। ईरान ने बहरीन में मौजूद दुनिया की बड़ी टेक कंपनी ‘अमेजन’ के सेंट्रल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर (जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना भी करती है) को मिसाइल से नष्ट करने का दावा किया है। इसके अलावा कुवैत के कैंप अल-अदिरी में अमेरिकी गोला-बारूद डिपो को भी निशाना बनाया गया है।
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