नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग और ठहरी हुई शांति वार्ता के बीच ईरानी नेवी ने ओमान की खाड़ी में खड़े एक अमेरिकी नेवी शिप पर कई राउंड फायर किए। ईरानी फायरिंग से मिडिल ईस्ट से लेकर पेंटागन तक हड़कंप मचा रहा। हड़कंप इसलिए क्योंकि जो हालात दुनिया के बने हुए हैं उनमें यूएस नेवी पर गोलियां दागना कोई छोटी बात नहीं है। ईरानी नौसेना ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी नेवी शिप इस इलाके में दूसरे जहाजों को परेशान कर रहा है। रोकाटोकी की जा रही है। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता क्योंकि यह पूरा इलाका ईरान का है। हालांकि अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है कि इस प्रकार का कोई मामला है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने एक बयान में कहा कि उसने “क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों” पर हमला किया और उन्हें “एयरोस्पेस मिसाइलों” से निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान ने खाड़ी के पड़ोसी देशों कुवैत और बहरीन पर सात मिसाइलें दागीं, लेकिन उनमें से कोई भी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची। इससे पहले, अमेरिका ने कहा था कि उसके बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर लॉन्च किए गए चार ईरानी ड्रोन को मार गिराया और ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित केशम द्वीप और गोरुक में “ईरानी तटीय निगरानी रडार साइटों” पर हमला किया। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव चरम पर है।
स्ट्रेट होर्मूज को लेकर छटपटाहट
ईरानी कब्जे वाले समुद्री रास्ते स्ट्रेट होर्मूज को लेकर अमेरिकी नेवी चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही है। स्ट्रेट हाेर्मूज पूरी तरह से ईरान के कब्जे में है। वहां गुजरने वाले कारोबारी जहाजों से ईरानी नौसेना तगड़ी रकम वसूल रही है। इस बात से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद क्षुब्ध हैं, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी स्ट्रेट होर्मूज को खुलवा नहीं पा रहे हैं। दरअसल स्ट्रेट होर्मूज को लेकर अमेरिका की छटपटाहट का अंदाजा इसी बात से भी लगाया जा सकता है कि इसके लिए उसकी दुनिया भर में किरकिरी हुई। डोनाल्ड ट्रंप ने नॉटो देशेां और यूरोपियन देशों से स्ट्रेट हाेर्मूज खुलवाने के सवाल पर मदद मांगी लेकिन सभी देशों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। कुछ देशों ने तो इसको लेकर बेहद तलख टिप्पणी तक की। स्ट्रेट होर्मूज को लेकर ट्रंप जितनी कोशिशें कर रहे हैं पेंच उतना ज्यादा फंसता जा रहा है। जब तक ईरान ने अमेरिका से किसी भी प्रकार की शांति वार्ता से इंकार किया है तब से हालात और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
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