छात्रों पर बर्बर दमन के जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह भी इस्तीफा दें!, रोजगार अधिकार अभियान ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व पेंशन के संवैधानिक अधिकार पर संघर्ष जारी रहेगा!
New Delhi/ लखनऊ। शिक्षा व्यवस्था में धांधली की जबावदेही तय कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर आयोजित संसद मार्च पर जिस तरह मोदी सरकार की पुलिस ने बर्बर दमन किया गया और सादी वर्दी में बच्चों को जिस बुरी तरह मारा गया है, उसके बाद मोदी सरकार ने सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। इसलिए धर्मेंद्र प्रधान के साथ इस दमन के जिम्मेदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह मांग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन में रोजगार अधिकार अभियान ने उठाई गई। प्रदेश के प्रयागराज, लखीमपुर, सीतापुर, चंदौली, सोनभद्र समेत विभिन्न जनपदों में यह ज्ञापन भेजे गए। रोजगार अधिकार अभियान ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पेंशन के संवैधानिक अधिकारों को हासिल करने और इसके लिए कॉर्पोरेट व सुपर रिच की सम्पत्ति पर टैक्स लगाने के सवाल पर उसका संघर्ष जारी रहेगा और 9 अगस्त से मिर्जापुर से इस संबंध में पूर्वांचल यात्रा भी निकली जाएगी।
सादे कपड़ों में भाजपा के गुंडों द्वारा पिटाई
20 जुलाई को जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस द्वारा जिस तरह से बर्बरता, अवैधानिकता, अत्यधिक बल प्रयोग, महिलाओं के साथ अभद्रता, सादे कपड़ों में भाजपा के गुंडों द्वारा पिटाई, पैलेट गन का प्रयोग, पुलिस वालों के डंडों में कील व करंट, पुलिस वालों के हाथों में लोहे की राड, डीके बासु मामले में सुप्रीम कोर्ट के वर्दी पर नेम प्लेट धारण करने के आदेशों की अवहेलना कर छात्रों का दमन किया गया, ऐसा लग रहा था कि मानो मोदी सरकार अपने ही बच्चों के विरुद्ध युद्ध में उतरी हो।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि संसद मार्च पर हुए पुलिस दमन की स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच कराई जाए। बिना वर्दी और बिना नेम प्लेट के कार्रवाई करने वाले सभी व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की जाए तथा यह बताया जाए कि किस सक्षम अधिकारी और मजिस्ट्रेट के आदेश पर लाठीचार्ज किया गया। शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल छात्रों, युवाओं और नागरिकों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए सभी लोगों को उचित उपचार और मुआवजा दिया जाए। साथ ही संविधान द्वारा प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की पूर्ण रक्षा सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में जंतर-मंतर पर नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेश सचान, लखीमपुर में जमशेद अली, प्रयागराज में इंजीनियर राम बहादुर पटेल, चंदौली में रहमुद्दीन, अजय राय, निसार अहमद, सीतापुर में डाक्टर बृज बिहारी, सुनीला रावत, लेखक अनुराग आग्नेय, सोनभद्र में सविता गोंड, रूबी सिंह गोंड, लखनऊ में एडवोकेट कमलेश सिंह, जैनुल आबदीन, गीता गौतम, एडवोकेट जगदीश पटेल, एडवोकेट वीरेंद्र सिंह, अहद शेख, आलोक कुमार, सुरेंद्र पांडेय, संदीप भार्गव अजीत कुमार आदि लोगों ने हिस्सा लिया।
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