नई सड़क खसरा 6041 सेंट्रल मार्केट की तर्ज पर होगा ध्वस्त
नई सड़क खसरा 6041 सेंट्रल मार्केट की तर्ज पर होगा ध्वस्त
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मेरठ। जमीनदोंज कर दिए गए सेंट्रल मार्केट के 661/6 पर बने मार्केट की तर्ज पर ही नई सड़क स्थित खसरा 6041 को जमीनदोज किए जाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सका, लेकिन तब होगा जब नियम कानून सभी के लिए समान हों, जिस तर्ज पर सेंट्रल मार्केट के सेक्टर दो, तीन और चार समेत आवास विकास परिषद ने अपनी सभी आवासीय योजनाओं में 815 भवनों पर नोटिस चस्पा किए और केवल नोटिस ही चस्पता नहीं किए बल्कि जहां भी नोटिस चस्पा किए गए हैं उन भवनों को आवास विकास परिषद के अफसर घड़ी की चौथाई में सेटबैक के नाम पर आगे पीछे से एक एक मीटर तोड़ने पर अमादा हैं। यदि महिलाओं का धरना ना होता तो आवास विकास ने गारंटी से सेटबैक के नाम पर अब तक बड़े स्तर पर तोड़फोड़ कर जिन मकानों को नोटिस भेजे गए हैं उन्हें लेबनान के गाजा में तब्दील कर दिया गया होता। जिन 815 भवनों को नोटिस दिए गए हैं उनके आवंटी तो विरोध कर रहे हैं, इसलिए आवास विकास की जेसीबी हरकत में आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। लेकिन नई सड़क स्थित खसरा 6041 में चल रहे निर्माण पर कार्रवाई करने में आवास विकास परिषद के अफसरों क्यों दो कम आगे चार कदम पीछे हो रहे हैं। वहां तो कोई विरोध भी नहीं है और खसरा 6041 में तो नोटिस भी दिए जा चुके हैं। नगर निगम को नोटिस भेजा गया है और मेरठ विकास प्राधिकरण को चिट्ठी लिखी गयी है। इतना ही नहीं खसरा 6041 में चल रहे कथित अवैध निर्माण कराने वालों पर एफआईआर के लिए थाना नौचंदी में तहरीर भी दे दी गयी है। इसके बाद भी आवास विकास परिषद के अफसर जेसीबी स्टार्ट करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं या फिर यह मान लिया जाए कि सेंट्रल मार्केट के जिन लोगों को सेटबेक के नोटिस दिए गए हैं उनकी नाराजगी और गुस्सा कम करने भर के लिए नगर निगम को नोटिस की नौटंकी भर की गयी है, इससे इतर कुछ नहीं।
ध्वस्त होना तय
हालांंकि जानकारों की मानें तो देर सबेर ही सही लेकिन नई सड़क स्थित खसरा 6041 का हश्र सेंट्रल मार्केट के 661/6 की तर्ज पर होना तय है। यह बात नगर निगम के अफसर भी जानते हैं और आवास विकास प्रशासन भी। इतना ही नहीं मेरठ में जिनके हाथों में सिस्टम की बागदौड़ है वो भी इस सच्चाई को जानते हैं कि देर सवेर नई सड़क स्थित खसरा 6041 पर जो इमारत नगर निगम के द्वारा बनायी जा रही है उसको गिराया जाएगा। भले ही हाईकोर्ट के आदेश से ध्वस्त हो या फिर नोएडा के ट्विन टावर की तर्ज पर सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद गिरायी जाए, लेकिन इसका गिरना तय बताया जा रहा है। देखना यह हाेगा कि इस मामले को लेकर जिन्होंने हाईकोर्ट इलाहाबाद में जनहित याचिका दायर की हुई हैंं वो कितनी मजबूती से पैरवी करते हैं और नगर निगम इस मामले को लेकर कोर्ट के चाबुक की मार से कब तक खुद को महफूज रख पाता है। इस पूरे मामले का दारोमदार केवल और केवल याचिका दायर करने वालों की पैरवी तक टिका हुआ है। पैरवी यदि मजबूत होती है तो फिर सेंट्रल मार्केट के बाकि भवनों यानि जिन्हें सेटबैक के नोटिस दिए गए हैं उन्हीं के साथ साथ ही नई सड़क स्थित खसरा 6041 में कथित अवैध रूप से बनाया जा रहा नगर निगम का कार्यालय भी ध्वस्त हो जाएगा।
मलिकाना हक साबित नहीं
इस मामले में सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात तो यह है कि नगर निगम अभी तक नई सड़क स्थित खसरा 6041 का मालिकाना हक तक नहीं साबित कर सका है। नई सड़क स्थित खसरा 6041 का मालिकाना हक अलीगढ निवासी किसी माथुर परिवार के पास बताया जाता है, हालांकि इसके जो असली मालिक थे उनका निधन हो चुका है लेकिन मौत से पहले उनके द्वारा अपने करीबी रिश्तेदार के नाम नई सड़क स्थित खसरा 6041 की पावर ऑफअटार्नी करने की बात जरूर सुनने में आयी है। इसके अलावा इसके मालिकाना हक को लेकर एक वाद एसडीएम मेरठ की कोर्ट में चल रहा है। उसके अलावा नगर निगम के मालिकाना हक को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आरटीआई एक्टिविस्ट राहुल ठाकुर की ओर से भी जनहित याचिका दायर की गयी है। राहुल ठाकुर की याचिका को हाईकोर्ट ने सुनवाई के लायक मानते हुए स्वीकार कर लिया है, उस पर कई तारीख भी लग चुकी है। राहुल ठाकुर का कहना है कि दरअसल नगर निगम अफसर ही नहीं चाहते कि जनहित याचिका पर सुनवाई हो, क्योकि मालिकाना हक को लेकर नगर निगम के पास कोई कागजात नहीं हैं। इसलिए मालिकाना हक को लेकर दायर की गयी याचिका की सुनवाई से भगा रहे हैं।
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