नई दिल्ली। ईरान के साथ बातचीत पर पीछे हटने का एलान करने के बाद ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिका सैन्य ठिकाने पर भारी मिसाइलों से हमले किए हैं। इस हमले में अमेरिका को बड़ा नुकसान पहुंचा है। वहां हर तरफ तबाही का मंजर नजर आ रहा है। इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव का बढ़ना और दोबारा से जंग का छिड़ना तय माना जा रहा है। आशंका है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर बड़े और लगातार हमले कर सकते हैं। ईरान ने अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी खोलकर अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें बरसाईं। उसके पास अब भी फतह, खैबर शेकन और सेज्जिल जैसी सैकड़ों मिसाइलें बची हुई हैं, जो 2000 KM तक मार कर सकती हैं।
हर तरफ बर्बादी ही बर्बादी का मंजर
पश्चिम एशिया में भड़के नए सैन्य टकराव में ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। मिडिल ईस्ट में जारी इस भयंकर तनाव और तबाही की मुख्य घटनाओं से दुनिया डरी हुई है। इस नए टकराव को दुनिया में ईंधन की भारी कमी के तौर पर देखा जा रहा है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों—विशेष रूप से अल सलेम एयरबेस और कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट—को निशाना बनाकर ‘फतह’ मिसाइलें दागी गईं।
यूएस अटैक का बदला
ईरानी सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि उन्होंने यूएस अटैक का बदला लिया है। ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर भी हमले किए गए। तनाव इतना बढ़ गया है कि यूएई (अबू धाबी), सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के एयर डिफेंस सिस्टम को भी मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में नष्ट करना पड़ रहा है।
जंग का असर शेयर लुढका
ईरान और अमेरिका के बीच दोबार से जंग छिड़ने की आशंका के चलते भारत समेत पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में हा-हाकर मचा हुआ है। अकेले भारत में निवेशकों का लाखों करोड़ डूब गया है। बाजार का बुरा हाल है। जंग के आसार की वजह से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हो रही है। तमाम निवेशक अब अपनी रकम निकल रहे हैं। भारी बिकवाली की वजह से शेयर बाजार त्राहि-त्राहि कर रा है। सबसे ज्यादा मार आईटी शेयरों पर पड़ी है।
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