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जी न्यूज के सुभाष चंद्रा को फिलहाल राहत नहीं

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मुकेश अंबानी बोला था हमला, राहत के आदेशों पर फिलहाल लगा दी गयी है रोक, बैंकों ने भी किया था प्रबल विरोध

नई दिल्ली। मुकेश अंबानी के साथ टकराव की कीमत जी न्यूज के मालिक सुभाष चंद्रा को चुकानी पड़ सकती है, जिस उनके जिस 22 हजार करोड़ के कर्ज काे मामूली रकम के भुगवान के बाद खत्म कर दिए जाने की बात कही जा रही है, उस पर अब रोक लग गयी है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की 5 सदस्यीय विशेष बेंच ने जी समूह (Zee Group) के संस्थापक सुभाष चंद्रा के उस विवादित फैसले पर रोक (Stay) लगा दी है, जिसके तहत उन्हें लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के एवज में केवल 6.25 से 6.5 करोड़ रुपये चुकाने की अनुमति दी गई थी। हालांकि सफाई दी जा रही है कि मुकेश अंबानी और सुभाष चंद्रा के बीच का विवाद इस कानूनी मामले की मुख्य वजह नहीं है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता (Corporate Rivalry) का एंगल जरूर जुड़ गया है। रोक लगने की असली वजह बैंकों द्वारा अपनी रकम की वसूली के लिए उठाया गया कानूनी कदम है, न कि मुकेश अंबानी से विवाद। हालांकि, इस मुद्दे ने दोनों बड़े व्यापारिक घरानों के पुराने मतभेदों को एक बार फिर जनता के सामने ला खड़ा किया है।

मुकेश अंबानी पर सुभाष चंद्रा का हमला

अगस्त 2026 के आखिरी हफ्ते में जैसे ही इस कर्ज माफी को लेकर मीडिया में खबरें आईं, सुभाष चंद्रा ने एक वीडियो जारी कर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क (जैसे TV18, CNBC, News18) पर सीधा हमला बोला। चंद्रा ने आरोप लगाया कि रिलायंस के मीडिया चैनल्स उनके खिलाफ दुष्प्रचार (Misinformation Campaign) कर रहे हैं और यह नैरेटिव बना रहे हैं कि उन्होंने ₹22,000 करोड़ का लोन डकार लिया, जबकि यह रकम केवल उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी थी, न कि उनका व्यक्तिगत लोन था।

सुभाष चंद्रा को जवाब

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सुभाष चंद्रा के इन आरोपों को पूरी तरह से “निराधार” (Baseless) और गलत बताते हुए खारिज कर दिया। कंपनी ने शेयर बाजारों (BSE और NSE) को दी जानकारी में स्पष्ट किया कि उनके मीडिया घरानों ने कभी भी किसी को निशाना नहीं बनाया है और वे सुभाष चंद्रा का एक बिजनेसमैन के रूप में सम्मान करते हैं। अपने इस तीखे हमले के दो दिन बाद ही, 31 अगस्त 2026 को सुभाष चंद्रा ने अपने रुख में नरमी लाते हुए इंस्टाग्राम लाइव पर अंबानी के खिलाफ आरोपों का जिक्र करना बंद कर दिया। अब उनका पूरा ध्यान कर्जदाताओं के साथ बकाया राशि का निपटारा करने और अपने इंसॉल्वेंसी प्लान का बचाव करने पर है।

पुराने आदेश पर रोक

NCLT के अध्यक्ष जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने पुराने आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले के फैसले में कोई स्पष्ट बहुमत की राय नहीं थी। अदालत ने सुभाष चंद्रा को निर्देश दिया है कि वे मामले के लंबित रहने तक अपनी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी संपत्ति बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकते। NCLT ने सभी पक्षों और कर्जदाता बैंकों (जैसे यूनियन बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक आदि) को नोटिस जारी कर मामले की नए सिरे से विस्तृत सुनवाई का निर्णय लिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को तय की गई है।

बैंकों का विरोध

NCLT के फैसले पर रोक लगाने का मुख्य कारण कर्जदाता बैंकों (जैसे HDFC बैंक, यूनियन बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस) द्वारा दर्ज की गई कड़ी आपत्ति है। बैंकों का तर्क था कि ₹22,006 करोड़ की व्यक्तिगत गारंटी के बदले केवल ₹6.5 करोड़ का भुगतान स्वीकार करना (यानी लगभग 99.97% की भारी छूट या ‘हेयरकट’) उनके साथ सरासर नाइंसाफी है। NCLT की विशेष बेंच ने पाया कि पहले के आदेश में स्पष्ट बहुमत नहीं था, इसलिए इस पर रोक लगाई गई।
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