अग्निवीर अनस चौहान के खिलाफ थाना दौराला में जब मुकदमा लिखा गया था तब वह नाबालिग था और वह मामला आज भी हाईकोर्ट में है लंबित
मेरठ। मेरठ के दौराला इलाके में रहने वाले अग्निवीर अनस चौहान को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (Armed Forces Tribunal – AFT) ने सुनवाई के बाद बड़ी राहत दी है। न्यायाधिकरण ने अपने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व अग्निवीर अनस चौहान की याचिका को स्वीकार कर लिया और उन्हें नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण की चेयरपर्सन जस्टिस राजेंद्र मेनन और प्रशासनिक सदस्य रसिका चौबे की बेंच ने सेना द्वारा 20 जनवरी 2026 को जारी किए गए सेवा से हटाने (डिस्चार्ज) के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
सेना ने इसलिए किया था बर्खास्त
भारतीय सेना ने अनस चौहान को ‘सेना नियम 1954’ के तहत इस आरोप में सेवामुक्त किया था कि उन्होंने नामांकन फॉर्म भरते समय अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले (FIR) की जानकारी छुपाई थी। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि जिस आपराधिक मामले का जिक्र किया जा रहा है, वह घटना अनस चौहान के नाबालिग रहते हुए हुई थी।
राहत का कानूनी आधार
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के नियमों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि किसी नाबालिग द्वारा ऐसे मामलों की जानकारी न देने पर उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती और न ही उसे नौकरी से अयोग्य ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने सेना की कार्रवाई को “कानूनी तौर पर अस्थिर” करार दिया। सेना के न्यायाधिकरण ने सेना को आदेश दिया है कि अनस चौहान को सभी सेवा लाभों के साथ वापस ड्यूटी पर बहाल किया जाए।
ये है पूरा मामला
अनस चौहान के खिलाफ यह प्राथमिकी 3 अक्टूबर 2020 को मेरठ के एक थाने में दर्ज की गई थी। मामला गांव में हुए एक आपसी झगड़े से जुड़ा था, जिसमें अनस चौहान सहित कुल 16 लोगों को नामजद किया गया था। जब 2020 में मेरठ में यह मुकदमा दर्ज हुआ था, तब अनस चौहान की उम्र करीब 17 वर्ष (नाबालिग) थी। इसी आधार पर सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने उनकी सेवा बहाली का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह मुकदमा वर्तमान में कोर्ट में लंबित है। यह मामला गांव के आपसी विवाद से जुड़ा था, जिसमें उनके ऊपर FIR दर्ज की गई थी। इस मुकदमे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 10 अप्रैल 2025 को एक आदेश पारित किया था। हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया था कि भर्ती प्रक्रिया के लिए इस FIR को मात्र एक लंबित आपराधिक मामला माना जाए, न कि कोई दोषसिद्धि है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि क्योंकि यह घटना अनस के नाबालिग (Minor) रहते हुए हुई थी, इसलिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत इस लंबित मुकदमे का उनकी नौकरी और बहाली पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
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