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हरियाली के कातिलों पर शिकंजा तय

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हरियाली के कातिलों पर शिकंजा तय
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काट डाले नीम, पीपल और अशोक जैसे जीवन देने वाली हरे भरे विशाल वृक्ष, वन विभाग करेगा कार्रवाई, एसएसपी के एसओ मेडिकल को कार्रवाई के निर्देश

मेरठ। शास्त्री नगर सी ब्लॉक स्थित शहीद भगत सिंह पार्क के जीर्णोद्धार के नाम पर करीब 40 हरे-भरे पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। काटे गए पेड़ों में नीम, पीपल और अशोक के पेड़ शामिल हैं। स्थानीय निवासियों के द्वारा इस मामले की शिकायत जिला वन अधिकारी, एसएसपी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है। शिकायत के बाद जिला वन अधिकारी ने वन विभाग के दारोगा को मौके पर भेजकर जांच कराई। वहीं, एसएसपी ने भी मेडिकल इंस्पेक्टर को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इस घटना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में जबरदस्त गुस्सा है। मामले की जानकारी प्रभारी मंत्री को दिए जाने की भी जानकारी दी गयी है।

यह है मामला

गुरुवार सुबह उस समय गरमा गया, जब आरोपितों ने चोरी-छिपे काटी गई लकड़ियों को मौके से उठवाने का प्रयास किया। इसकी जानकारी पड़ोसियों को हुई तो उन्होंने मौके पर पुलिस बुला ली। पुलिस के पहुंचने के बाद लकड़ी उठाने की कार्रवाई रुक गई। क्षेत्रवासियों ने पुलिस और वन विभाग से मौके पर काटे गए पेड़ों और वहां पड़ी लकड़ियों की जांच कराने की मांग की है।

हरियाली उजाड़ने का आरोप

क्षेत्रवासियों प्रवीण शरण, प्रेमल रस्तोगी,मुकेश जैन वर्षा शरण कुशाग्र कुणाल प्रियांशी एकाग्र संजना आदि के अनुसार पार्क के जीर्णोद्धार की स्वीकृति मिलने पर लोगों को उम्मीद थी कि पार्क का स्वरूप बेहतर होगा। बच्चों, बुजुर्गों और आसपास के निवासियों के लिए सुविधाएं बढ़ने के साथ पार्क में हरियाली भी संरक्षित रहेगी। आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होते ही पार्क में वर्षों पुराने बड़े पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई और करीब 40 पेड़ काट दिए गए। लोगों का कहना है कि पार्क में विकास कार्य पेड़ों को संरक्षित रखते हुए भी कराया जा सकता था। नीम, पीपल और अशोक जैसे पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को हुए नुकसान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने यह भी मांग की है कि जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि पेड़ों की कटाई के लिए कितने पेड़ों की अनुमति ली गई थी और वास्तव में कितने पेड़ काटे गए।

वन विभाग की टीम पहुंची, एसएसपी ने दिए जांच के निर्देश

स्थानीय निवासी प्रवीण शरण की शिकायत पर जिला वन अधिकारी वंदना फौगाट ने वन विभाग के दारोगा को मौके पर भेजा था। वहीं प्रकरण को लेकर एसएसपी ने मेडिकल इंस्पेक्टर को भी जांच के निर्देश दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बावजूद अभी तक पेड़ों की कटाई को लेकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई है। अब काटी गई लकड़ियों को मौके से हटाने के प्रयास ने मामला और गंभीर कर दिया है। पड़ोसियों द्वारा पुलिस बुलाए जाने के बाद लकड़ी उठाने की कार्रवाई रुक गई। लोगों ने मांग की है कि काटे गए पेड़ों की संख्या, प्रजाति, कटाई की अनुमति और लकड़ी को मौके से हटाने के प्रयास की भी जांच कराई जाए। यदि बिना अनुमति या अनुमति से अधिक पेड़ों की कटाई सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। क्षेत्रवासियों ने पार्क में बचे पेड़ों को सुरक्षित रखने के साथ काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए पर्याप्त संख्या में नए पौधे लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पार्क के विकास की कीमत वर्षों पुरानी हरियाली को उजाड़कर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
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