भ्रष्टाचार की जीरो टालरेंस नीति को कनिष्ट सहायक का पलीता
भ्रष्टाचार की जीरो टालरेंस नीति को कनिष्ट सहायक का पलीता
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आरएफसी (सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, मेरठ सम्भाग) में कनिष्ठ सहायक पद पर तैनात कर्मी पर सिद्ध बाबा कन्सट्रक्सन विभागीय ठेकेदार से बैंक खाते में रिश्वत वसूलने का आरोप
मेरठ। सीएम योगी की भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति को आरएफसी के एक कनिष्ठ लिपिक और उसके मददगार बताए जा रहे आरएमओ ने ही पलीता लगा डाला। इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ना कहे तो और क्या कहें, अब तक जो रिश्वत चोरी छिपे टेबल के नीचे से ली जाती थी आरएफसी कार्यालय में ठेके देने में वो रिश्वत अब खुलेआम और ऑन लाइन ली जा रही है। इतना ही नहीं जब इस मामले की शिकायत की गयी तो आरोपी को बचाने के लिए आरएफसी के जिन अफसरों से जांच कर कार्रवाई की उम्मीद थी, उन अफसरों ने आरोपी कनिष्ठ सहायक गौरव शर्मा जो हैण्डलिंग परिवहन जैसे महत्वपूर्ण पटल तैनात हैं को अपने बैंक खाते में कथित रूप से रिश्वत लेने के जो आरोप लगाए गए हैं उनकी जांच सौंप दी। नौबत केवल आरोपी को जांच सौंपे जाने की होती तो भी गनीमत थी। यहां तो सक्ष्म अधिकारी शिकायत करने वाले को ही कठघरे में खड़ा करने पर तुले हैं। मामले की शिकायत करने वाले ने सक्षम अधिकारी पर आरोपी कनिष्ठ सहायक को बचाने व मामले में लीपापोती करने के लिए बेतुके सवाल किए जाने के आरोप तक लगाए हैं। इस मामले में शासन से आयी जांच को भी प्रभावित किए जाने के आरोप आरएफसी ऑफिस में बैठने वाले अफसरों पर लगाए गए हैं।
यह है पूरा मामला
यह पूरा मामला सिद्ध बाबा कन्सट्रक्सन विभागीय ठेकेदार से जुड़ा है। आरोप है कि गौरव शर्मा, कनिष्ठ सहायक द्वारा सिद्ध बाबा कन्सट्रक्सन विभागीय ठेकेदार से अपने कोटेक बैंक खाता संख्या – 2646275323 में दिनॉक – 29.09.2025 को उपरोक्त बैंक खाते में 02 लाख रूपये, दिनॉक 03.10.2025 को कोटेक महिन्द्रा बैंक खाते में 50 हजार रूपये, दिनॉक 13.10.2025 को उक्त खाते में 01 लाख रूपये तथा दिनॉक – 12.11.2025 को उक्त खाते में 01 लाख रूपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किये। इस मामले की शिकायत रोहित कुमार निवासी ग्राम निडावली, पोस्ट अलीपुर मोरना, ब्लॉक हस्तिनापुर ने शासन के प्रमुख सचिव खाद्य रसद रणवीर प्रसाद, आयुक्त खाद्य तथा रसद जवाहर भवन, लखनऊ, संजय मीना , सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, मेरठ सम्भाग से की है। केवल शिकायत ही नहीं की गयी है बल्कि शिकायत के साथ रोहित कुमार ने बाकायदा नोटरी कराकर शपथ पत्र भी दाखिल किया है और कथित आरोपी गौरव शर्मा के उन बैंक खातों की जांच कराए जाने का आग्रह किया गया है जिनमें रिश्वत की रकम ऑन लाइन लिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। रोहित का आरोप है कि उसके द्वारा उपरोक्त दिनॉकों में ई मेल द्वारा आपको एवं अन्य उच्चाधिकारियों से की गयी जिस पर सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी, मेरठ सम्भाग, मेरठ द्वारा शपथ पत्र मांगा गया जोकि उन्होंने 20 अगस्त को दस्ती रूप में कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर एवं ई मेल से 24 अगस्त को प्रेषित कर दिया।
अजीब तर्क
रोहित ने बताया कि उसके द्वारा की गयी शिकायतों की जांच कर बजाए आरोपी पर कार्रवाई करने के सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी, मेरठ सम्भाग, मेरठ हतोत्साहित करने की नीयत से दाखिल किए गए शपथ पत्र को मूल रूप से यह कहकर वापिस कर दिया गया कि खरीदा गया स्टाम्प पेपर कैन्डिडेट के नाम से है, जबकि स्टाम्प पेपर स्वयं के नाम से होना चाहिए था, का कथन किया गया है जबकि मेरे निजी ज्ञान के अनुसार यदि कोई स्टाम्प पेपर कैन्डिडेट के नाम से खरीदकर नोटेरी कराकर केवल शिकायत की पृष्टि करायी जाती है तो वह अपने आप में पर्याप्त है, क्योंकि प्रदेश सरकार द्वारा किसी भी शासनादेश एवं विभागीय नियम के अन्तर्गत कही भी यह अंकित नहीं किया गया है कि शपथ पत्र कैन्डिडेट के नाम से नहीं हो सकता, केवल शासनादेश एवं विभागीय नियमों में शपथ पत्र देने की व्यवस्था है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ऑनलाइन जारी किये जाने वाले स्टाम्प पेपर पर धारा-04 के अन्तर्गत शपथ पत्र की व्यवस्था है, कैन्डिडेट का हिन्दी रूपान्तरण आवेदक ही होता है। शिकायकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद भी सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी, मेरठ सम्भाग, मेरठ द्वारा गौरव शर्मा की उत्कोच प्राप्त करने की गम्भीर शिकायत का संज्ञान न लेकर शपथ पत्र वापिस करना आशंकित करता है कि सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी निश्चल आनन्द का गौरव शर्मा को पूर्ण संरक्षण है। गौरव शर्मा द्वारा अपने कोटेक बैंक में प्राप्त रू0 4.5 लाख की धनराशि ठेकेदार को लाभ पहुचाने की नीयत से प्राप्त की गयी है । वर्तमान में भी टेण्डर प्रक्रिया जारी है। ई मेल आरएफसी कार्यालय मे उपलब्ध होने के बावजूद भी जानबूझकर उच्च स्तरों से पेपरलैस कार्यवाही करने के निर्देशों की अवमानना करते हुए मुझे रजिस्टर्ड डाक से पत्र प्रेषित किये जा रहे है ताकि इस गम्भीर मामले में लीपा पोती करना सम्भव हो सके।
जांच के नाम पर खेल की आशंका
बैंक खातों में कथित रूप से रिश्वत प्राप्त करने के इस मामले का खुलासा व शिकायत करने वाले ने आशंका जतायी है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी भी आरोपी कनिष्ठ सहायक द्वारा प्राप्त की जा रही उत्कोच में भागीदार हों, क्योंकि इतने गम्भीर मामले में जिसमें बैंक खाते में रिश्वत प्राप्त करने के प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद भी आरोपी को हैण्डलिंग परिवहन जैसे महत्वपूर्ण पटल पर बनाये हुये है । इतना ही नहीं राजीव कुमार, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी शासनादेश संख्या-1/2018/117/पैतीस-2-2018-3/39(4)/18 दिनॉक–08.02.2018 की स्पष्ट अवमानना करते हुए बैंक खाते में उत्कोच प्राप्त करने जैसे अति गम्भीर प्रकरण में पत्राचार एवं अग्रिम कार्यवाही भी आरोपी के माध्यम से ही करायी जा रही है जोकि इनके उपरोक्त कार्यालय पत्रॉक से ही स्पष्ट हो रहा है। उक्त शासनादेश में दी गयी व्यवस्था के अनुपालन में स्वयं की जॉच करने वाले / स्वयं के सम्बन्ध में स्वंय पत्राचार करने वाले कनिष्ठ सहायक को तत्काल निलम्बित कर विभागीय कार्यवाही करने एवं सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए इनका स्पष्टीकरण प्राप्त कर प्रतिकूल प्रविष्टि दिलाने की संस्तुति शासन स्तर पर करने का कष्ट करें। शासन को भेजे गए पत्र में शिकायत करने वाले रोहित ने कहा है कि आरएमओ मेरठ की कार्यप्रणाली को देखते हुए मुझे पूर्ण आशंका ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि शिकायत पर जांच के बजाए मामले को ही प्रभावित करने की जांच शासन से टीम भेजकर करायी जाए।
तो क्या आरएफसी तक नहीं पहुंच रही शिकायतें
आरएफसी का वैकल्पिक चार्ज इस समय मेरठ विकास प्राधिकरण के वीसी संजय मीणा पर है। शिकायत करने वाले का आरोप है कि जो भी शिकायतें ई-मेल से की जा रही हैं उनकाे देखने का काम संबंधित लिपिक करता है। संबंधित लिपिक और आरएमओ ही आरोपी कनिष्ठ सहायक को बचाने में लगे हैं, जिसकी वजह से यह शिकायत आरएफसी का अतिरिक्त कार्य देख रहे एमडीए वीसी तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
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