मेरठ। मानसून से पहले नालों की सफाई को लेकर नगर निगम के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। खैर नगर और दिल्ली रोड जैसे प्रमुख इलाकों में नाले कूड़े से अटे पड़े हैं। नालों की हालत कितनी खबरा है इसका अंदाजा वार्ड 60 के पार्षद नीरज जो अपने वार्ड के नाले की सफाई ना किए जाने से खिन्न होकर खुद ही नाले में उतर गए और नाला साफ कर डाला। वार्ड 60 की घटना वानगी भर है। नगर निगम के पार्षद कक्ष में बैठने वाले ज्यादातर पार्षदों की शिकायत है कि पूरे महानगर के नालों की कमावेश ऐसी ही दशा है। मानसून से पहले नालों की तल्लीझाड़ सफाई हो सकेगी इसकी कोई उम्मीद नहीं है और नाले साफ ना हुए तो फिर इस बार मानूसन में शहर टापू में तब्दील हो जाएगा और यदि शहर टापू में तब्दील हुआ तो यह भी संभव है कि पिछले साल की भांति इस साल भी कमिश्नर और डीएम सरीखे बड़े अफसरों को शहर कोतवाली के बुढानागेट और बच्चापार्क सरीखे महानगर के किसी दूसरे इलाके में या उसी इलाके में बारीश के पानी में उतरना पड़े और उसके बाद ही नालों की सफाई हो।
नाला सफाई को लेकर नगरायुक्त गंभीर
ऐसा नहीं कि नगरायुक्त सौरभ गंगवार महानगर के नाले नालों की सफाई को लेकर गंभीर नहीं है। मातहतों के साथ नालों की सफाई को लेकर वह लगातार बैठकें कर रहे हैं। सख्त लहजे में हिदायत दे रहे हैं कि हर हाल में मानसून के सक्रिय होने से पहले महानगर के सभी प्रमुख नाले नालों की सफाई करा दी जाए। नगरायुक्त सौरभ गंगवार नियमित रूप से स्वयं भी नालों की सफाई का जायजा ले रहे हैं। आमतौर पर वह सुबह सात बजे महानगर में निरीक्षण के लिए इन दिनों निकल रहे हैं। ऐसा नहीं कि काम नहीं हो रहा है। काम हो भी रहा है, लेकिन यह भी सही है कि महानगर की आबादी के अनुपात में जितने संसाधन होने चाहिए उतने संसाधन संभवत नगर निगम के पास अभी नहीं हैं। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि नालों की सफाई में बड़ी बाधा अवैध कब्जे हैं। हालांकि नाला-नाली गैंग बना दिया गया है। चौबीस घंटे सफाई अभियान चलाया जा रहा है। मेरठ के सबसे पुराने नालों में शुमार ओडियन नाले से सफाई अभियान की शुरूआत की गयी है। इसके अलावा कसेरूखेड़ा नाला, आबूनाला, दिल्ली रोड नाले सहित सभी बड़े नालों की सफाई मशीनों से रात में करायी जा रही है। छोटे बड़े सभी नालों की सफाई मानसून से पहले करा दी जाएगी। सौरभ गंगवान ने बताया कि नाला सफाई करने वाले गैंग को मौके पर ही सिल्ट उठाने का निर्देश है। मुहल्ले की नालियों की सफाई के लिए प्रत्येक वार्ड में स्वच्छता कर्मियों की टीम लगा दी गई है। बच्चा पार्क,ईदगाह, मनसबिया, इंदिरा चौक की भूमिगत नाले की क्रासिंग की सफाई कराई जा चुकी है। अत्यधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में जैसे डिफेंस कॉलोनी, जिमखाना, लेडीज पार्क, माधवपुरम, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कराए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नगरायुक्त ने यह भी बताया कि जलभराव को केंद्रित कंट्रोल रूम और जलनिकासी बाधित होने पर लगाए जाने वाले पंपसेट भी तैयार कर कराए जा रहे हैं।
शहर के प्रमुख नाले
कैंट और शहर की घनी आबादी के बीच से होकर बहने वाला आबूनाला शहर का एक बहुत प्रमुख और पुराना नाला है, महानगर के कई इलाकों और आसपास के इलाकों से सीवर व वर्षा का जल लेकर बहता है। ओडियन नाला भी शहर की घनी आबादी के बीच होकर बहता है और बाद में कालीनदी में मिल जाता है। इसी तर्ज पर जो अन्य नाले हैं उनमें दिल्ली रोड नाला, माधवपुरम नाला, शहर घंटाघर कोटला नाला, पत्थर वालान नाला सरीखे ऐसे तमाम नाले हैं जो यदि तल्ली झाड़ साफ करा दिए जाएं तो महानगर को मानसून में जलभराव की मुसीबत से बचाया जा सकता है।
इस साल राहत की आस
शास्त्रीन सेक्टर पांच और सेक्टर छह शास्त्रीनगर के लोगों को इस बार मानसून में इस समस्या से निजात की उम्मीद जाहिर की जा रही है। नगर निगम ने जलनिकासी को बेहतर बनाने के लिए भूमिगत नाले का निर्माण शुरू करा दिया है। दो महीने के भीतर यह नाला बनकर तैयार होगा। ठेकेदार को निगम अधिकारियों ने यह निर्देश दिया है। हालांकि जब तक मानूसन सक्रिय होगा तब तक ये नहीं बनपाएंगे। बीच मानसून संभवत उनका निर्माण कार्य भी रोक दिया जाए।
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