बेगमबाग के इस बदहाल इलाके में भाजपा नेता व महापौर हरिकांत अहलूवालिया का पुश्तैनी घर है मौजूद
मेरठ। महानगर को स्मार्ट और गड्ढामुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच मेरठ का प्रमुख इलाका बेगमबाग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह क्षेत्र वर्तमान महापौर (मेयर) हरिकांत अहलुवालिया का पुश्तैनी इलाका माना जाता है। इसके बावजूद, यहाँ की सड़कें और गलियां इस कदर बदहाल हैं कि स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। जगह-जगह टूटी सड़कें, गहरे गड्ढे और जलभराव के कारण यह पूरा क्षेत्र इस समय प्रशासनिक उपेक्षा का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है।
पैदल चलना भी हुआ दूभर, मंडरा रहा हादसों का खतरा
बेगमबाग की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक का पैदल सफर भी अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। सड़कों पर उभरे गहरे गड्ढों के कारण आए दिन राहगीर और वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि आए दिन यहाँ छोटे-बड़े एक्सीडेंट होते रहते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं रह गया है, वहीं स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के गिरने और चोटिल होने का डर लगातार बना रहता है।
धूल के गुबार से बीमारी का खतरा, कराह रहे दुकानदार और निवासी
टूटी सड़कों के कारण इस पूरे इलाके में दिन भर धूल उड़ती रहती है, जिससे बेगमबाग एक तरह से डस्ट जोन में तब्दील हो गया है। इस उड़ती धूल की वजह से स्थानीय लोग सांस की बीमारियों, एलर्जी और आंखों में संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। घरों और दुकानों के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने के बाद भी धूल अंदर तक प्रवेश कर रही है। इस बदहाली की मार यहाँ के व्यापार पर भी बुरी तरह पड़ी है।
बदहाली पर फूटा जिम्मेदार नागरिकों और कारोबारियों का गुस्सा
बेगमबाग की इस दयनीय स्थिति को लेकर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारियों ने नगर निगम व मेयर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीखे शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हालात तुरंत सुधारने की मांग की है। अमित शर्मा (सामाजिक कार्यकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट): “नगर निगम कागजों पर शहर को गड्ढामुक्त और स्मार्ट बनाने के दावे कर रहा है, लेकिन धरातल पर हकीकत बेगमबाग जैसी मुख्य जगहों पर देखी जा सकती है। मेयर साहब के अपने पुश्तैनी क्षेत्र की यह दुर्दशा प्रशासनिक नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है। आरटीआई के माध्यम से हम सड़क निर्माण के बजट का ब्योरा मांगेंगे। हमारी मांग है कि प्रशासन राजनीति और दिखावे से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण मार्ग की मरम्मत का कार्य तत्काल युद्ध स्तर पर शुरू कराए, ताकि जनता को राहत मिल सके।” विपिन बंसल (सामाजिक कार्यकर्ता): “बेगमबाग में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों का जीवन इस समय खतरे में है। आए दिन लोग इन गहरे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं और एक्सीडेंट आम बात हो गए हैं। स्थानीय लोगों के टैक्स के पैसे से चलने वाले नगर निगम को जनता के इस दुख-दर्द से कोई सरोकार नहीं दिख रहा। यदि जल्द ही सड़कों और गलियों को दुरुस्त कर इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो हम क्षेत्रवासियों को साथ लेकर नगर निगम के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”
जनता का तीखा सवाल
मेयर के गृह क्षेत्र की ऐसी दुर्दशा को लेकर अब जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। आक्रोशित जनता अब खुलकर सवाल उठा रही है कि जो महापौर अपने पुश्तैनी इलाके की गलियों और सड़कों का सुधार नहीं करा पा रहे हैं, वे पूरे मेरठ महानगर का विकास क्या खाक कराएंगे? लोगों का कहना है कि यदि मेयर साहब के अपने ही क्षेत्र में विकास कार्यों की यह गति है, तो शहर के बाकी हिस्सों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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