कालेज की लापरवाही की कीमत चुकाएंगे बोर्ड परीक्षार्थी
कालेज की लापरवाही की कीमत चुकाएंगे बोर्ड परीक्षार्थी
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कुछ ने तो ना चेक लिस्ट डाउन लोड की और कुछ ने डीआईओएस)कार्यालय में ट्रेजरी चालान किया है दाखिल
मेरठ। हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा की तैयारी कर रहे कुछ परीक्षार्थियों को उन कालेजों की लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ सकती है जहां से उन्होंने फार्म भरा है। दरअसल हुआ यह है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अग्रिम पंजीकरण और आवेदन फॉर्म भरने वाले छात्र-छात्राओं के लिए परेशान करने वाली खबर है। बोर्ड द्वारा बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद प्रदेश के 940 विद्यालयों ने अब तक परिषद के पोर्टल से अभ्यर्थियों की नामावली (चेकलिस्ट) जनरेट या डाउनलोड नहीं की है। बोर्ड ने पहले इसके लिए 15 अक्टूबर 2026 की तिथि तय की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 22 अक्टूबर 2026 किया गया था। यह विस्तारित समयसीमा भी बीत चुकी है, लेकिन इन स्कूलों ने अब तक जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में ट्रेजरी चालान (कोषपत्र) की प्रति के साथ नामावली जमा नहीं कराई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की सत्र 2026-27 के अग्रिम पंजीकरण (कक्षा 9वीं व 11वीं) और परीक्षा आवेदन (कक्षा 10वीं व 12वीं) की नामावली जनरेट न करने वाले प्रदेश के 940 डिफ़ॉल्टर स्कूलों में मेरठ मंडल के विद्यालय भी शामिल हैं। मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़ और बागपत जिलों के कई माध्यमिक विद्यालयों द्वारा इस प्रक्रिया में बरती गई शिथिलता को शिक्षा विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है।
कालेजों को नोटिस
15 अक्टूबर की पहली डेडलाइन के बाद बोर्ड ने तारीख बढ़ाकर 22 अक्टूबर की थी, लेकिन मेरठ मंडल के कई स्कूल फिर भी डेटा डाउनलोड करने से चूक गए। मामला सामने आते ही मेरठ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) और क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षकों को इन स्कूलों की सूची सौंपकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मेरठ और आसपास के जिलों के इन दोषी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि तय समय में अभ्यर्थियों की चेकलिस्ट डाउनलोड क्यों नहीं की गई। अधिकारियों के मुताबिक, नामावली जनरेट करना केवल एक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके जरिए छात्र-छात्राओं के नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि और विषयों में लिपिकीय त्रुटियों को सुधारा जाता है। मेरठ मंडल के जिन स्कूलों ने इसे डाउनलोड नहीं किया है, वहां के हजारों छात्रों के विवरण में सुधार रुक गया है। अगर 26 अक्टूबर तक भी यह काम पूरा नहीं हुआ, तो 2027 की मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के प्रवेश पत्र लटक सकते हैं।
प्रधानाचार्यों से मांगी सफाई
विस्तारित तिथि बीतने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों द्वारा नामावली जनरेट न किए जाने को यूपी बोर्ड प्रशासन और शिक्षा विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक के निर्देश पर स्कूलों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों से जानकारी तलब की गयी है। विभाग की ओर से इन सभी संस्थानों को कारण बताओ नोटिस (स्पष्टीकरण) जारी किया जा रहा है। यदि समय रहते स्कूलों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो इन पर भारी जुर्माने के साथ-साथ विद्यालय की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है।
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