नई दिल्ली। इंडिया ब्लॉक की रामलीला मैदान महारैली को दुनिया के प्रमुख समाचार नेटवर्कों जैसे BBC News और Deutsche Welle यानि DW व CNN ने जहां भरपूर कवरेज दी है वहीं दूसरी ओर नेशनल मीडिया यानि खुद को मेनस्ट्रीम मीडिया समझने वाले नेशनल मीडिया हाउस ने वो कवरेज नहीं दी बतायी जाती है जिसकी तवज्जो इंडिया ब्लॉक के नेता कर रहे थे। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को हुई इंडिया (INDIA) गठबंधन की महारैली को मिले कवरेज में नेशनल मीडिया और विदेशी मीडिया (जैसे BBC और DW) के बीच स्पष्ट अंतर देखा गया है। जहां विपक्षी दल और विश्लेषक इसे मुख्यधारा के मीडिया के “पूर्वाग्रह” के रूप में देखते हैं, वहीं दोनों पक्षों के विश्लेषकों, मीडिया हाउसों और राजनीतिक दलों ने इस कवरेज के अंतर के पीछे कई अलग-अलग और महत्वपूर्ण कारण बताए हैं।
नेशनल मीडिया यानि धंधे की मजबूरी
विदेशी मीडिया आउटलेट्स पर भारतीय विज्ञापनदाताओं या राजनीतिक दबाव का सीधा प्रभाव नहीं होता, इसलिए वे भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और नागरिक विरोधों को एक निष्पक्ष या अंतरराष्ट्रीय ‘ग्लोबल न्यूज़’ के नजरिए से बिना किसी हिचकिचाहट के कवर करते हैं। विपक्ष और स्वतंत्र मीडिया विश्लेषकों का लंबे समय से आरोप रहा है कि भारत के अधिकांश बड़े टीवी चैनल और समाचार पत्र सरकार समर्थक दृष्टिकोण (जिसके लिए विपक्षी दल अक्सर ‘गोदी मीडिया’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं) रखते हैं। आलोचकों के अनुसार, राष्ट्रीय मीडिया ऐसे बड़े विपक्षी प्रदर्शनों को उतनी प्रमुखता नहीं देता जिससे सरकार असहज हो या चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल उठें। इस रैली का कवरेज टीवी स्क्रीन के बजाय डिजिटल स्पेस में कहीं ज्यादा बड़ा था। यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram) और स्वतंत्र समाचार पोर्टलों पर इस रैली के लाइव जनसैलाब और ग्राउंड रिपोर्ट्स को लाखों व्यूज मिल रहे थे। युवा पीढ़ी और स्वतंत्र पत्रकार इसे मुख्यधारा के टीवी चैनलों की विफलता के रूप में देख रहे हैं, जो जमीनी मुद्दों के बजाय स्टूडियो डिबेट्स को अधिक प्राथमिकता देते हैं।
सरकार व भाजपा का रूख
सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) और उसके समर्थकों का यह स्पष्ट रुख है कि इस रैली में विदेशी मीडिया की अत्यधिक दिलचस्पी सामान्य नहीं है। सत्तापक्ष के नेताओं के अनुसार, विदेशी मीडिया अक्सर भारत विरोधी पारिस्थितिकी तंत्र (Anti-FCRA ecosystem) का हिस्सा बनकर देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करता है।
काउंटर-प्रोग्रामिंग
1 नवंबर को जहां एक तरफ रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन का मार्च था, वहीं भाजपा ने दिल्ली में ही ‘लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा’ के रूप में एक जवाबी प्रदर्शन शुरू कर दिया। नेशनल मीडिया (विशेषकर टीवी चैनलों) ने ‘स्क्रीन स्प्लिट’ (दोनों खबरों को एक साथ दिखाना) करके कवरेज को आधा-आधा बांट दिया। इस काउंटर-प्रोग्रामिंग की वजह से भी विपक्ष को वो ‘एकतरफा बड़ी कवरेज’ नहीं मिल सकी जिसकी उसे उम्मीद थी।
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