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पांच करोड़ जुर्माने के बाद भी हालात जस के तस

पांच करोड़ जुर्माने के बाद भी हालात जस के तस

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पांच करोड़ जुर्माने के बाद भी हालात जस के तस
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तमाम कोशिशों के बाद भी सुधर नहीं रही है निगम की लोहिया नगर साइट की स्थिति, नयी कार्ययोजना पर काम

मेरठ। लोहिया नगर डंपिंग ग्राउंड पर कचरा प्रबंधन से नाराज उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगर निगम पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाए जाने के बाद भी हालात जस के तस हैं। हालांकि बतौर नगरायुक्त सौरभ गंगवार के चार्ज संभालने के बाद इस दिशा में काफी काम हो रहा है इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता। वर्तमान में इस साइट पर स्थिति बेहद भयावह है, लेकिन नगर निगम ने अब इस कचरे के पहाड़ को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक नई कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है।

निस्तारण से कई गुना ज्यादा कचरा

शहर जितना कचरा उगलता है उस अनुपात में निस्तारण क्षमता नहीं है। प्रतिदिन सैकड़ों टन नया कचरा निकलता है। पुराने डंप पड़े कचरे (लिगेसी वेस्ट) को साफ करने की रफ्तार के मुकाबले रोजाना आने वाले नए कचरे की मात्रा बहुत ज्यादा है, जिससे डंपिंग ग्राउंड का बोझ कम नहीं हो पा रहा है। जनता के स्तर पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने की व्यवस्था पूरी तरह फेल है। मिक्स्ड कचरे को प्रोसेस करना तकनीकी रूप से बेहद धीमा और खर्चीला होता है। लोहियानगर और अन्य कचरा साइटों पर लगी सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग मशीनें अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं। इसके पीछे कुछ तकनीकि कारण बताए गए हैं।

मुंह बाए खड़ी हैं चुनौतियां

कचरा निस्तारण के मामले में नगर निगम के कामों की अनदेखी करना न्याय संगत नहीं होगा, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। पांच करोड़ के इस भारी जुर्माने और दस लाख प्रति महीने की पेनल्टी ने नगर निगम की वित्तीय कमर तोड़ दी है। विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा मुकदमों और जुर्मानों में उलझने के कारण नई आधुनिक कचरा प्रोसेसिंग तकनीकों को खरीदने में फंड की कमी आड़े आ रही है। घनी आबादी वाले शहर में नए ट्रेंचिंग ग्राउंड या कचरा निस्तारण प्लांट लगाने के लिए जमीन की भारी कमी है। किसी नए इलाके में प्लांट लगाने का प्रस्ताव आते ही स्थानीय निवासियों और किसानों का भारी विरोध शुरू हो जाता है। कचरा निस्तारण और डोर-टू-डोर कलेक्शन के लिए अनुबंधित निजी कंपनियों और कार्यदायी संस्थाओं का लचर रवैया भी बड़ी मजबूरी है। नगर निगम चाहकर भी रातों-रात इन कड़े अनुबंधों को रद्द नहीं कर पाता क्योंकि नई व्यवस्था बनाने में महीनों का समय लगता है। यह सब इतना आसान भी नहीं है। नगर निगम अब नए सिरे से कचरा प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने में जुटा है। हालांकि, जब तक शहर के नागरिक जागरूक होकर कचरे का वर्गीकरण नहीं करेंगे और निगम प्रशासन ठोस इच्छाशक्ति के साथ नए प्लांट्स को चालू नहीं करेगा, तब तक शहर को कचरे के इन पहाड़ों से मुक्ति मिलना मुश्किल नजर आता है।

वर्जन निगम प्रशासन

इसको लेकर नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि लोहिया नगर में दशकों से जमा 10 लाख टन से अधिक पुराने लीगेसी वेस्ट के स्थाई निस्तारण के लिए नगर निगम ने अब नया करार किया है। इसके तहत साइट पर आधुनिक मोबाइल ट्रामल प्लांट (छंटनी मशीनें) स्थापित की जा रही हैं। इस कचरे को छांटकर इससे निकलने वाले प्लास्टिक व रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल को सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में भेजा जाएगा।
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