मेरठ। दिल्ली में प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल होने से पहले सुदीप जैन को घर में नजरबंद किए जाने की खबर मिलते ही शनिवार सुबह उनके ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आवास पर समर्थकों का जमावड़ा लग गया। देखते ही देखते सैकड़ों समर्थक एकत्रित हो गए और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के कथित हनन के विरोध में आवाज बुलंद की। सुदीप जैन जैसे ही समर्थकों के साथ दिल्ली रवाना होने के लिए घर से निकले, पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया। इस दौरान सुदीप जैन ने पुलिस से सवाल किया कि उन्हें दिल्ली जाने से रोकने का कानूनी अधिकार क्या है? उनके सवालों पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। विरोध के बीच पूरा क्षेत्र ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। सुदीप जैन ने कहा, “यह किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं, बल्कि एक मुद्दे और लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन है। शांतिपूर्ण आंदोलन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। बिना स्पष्ट कानूनी आधार के किसी को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों का महत्व वही समझ सकते हैं, जिन्होंने जनता के साथ और जनता के लिए संघर्ष किया हो। भारत को आजादी जनसंघर्षों से मिली है, लेकिन सत्ता में बैठकर तानाशाही रवैया अपनाने वाले लोग जनता की आवाज और आंदोलनों की ताकत को नहीं समझते।
सुदीप जैन ने कहा कि सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस हर नागरिक में होना चाहिए। आज जब युवा अपने अधिकारों की मांग लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो उन्हें बदनाम करने के लिए आतंकवादी या पाकिस्तान समर्थक तक कह दिया जाता है और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचे जाते हैं।
उन्होंने युवाओं के संघर्ष को इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त किया—
“साजिशें रच लो तुम चाहे जितनी, रण को ये न छोड़ेंगे, कलयुग के अभिमन्यु हैं ये, सारे चक्रव्यूह तोड़ेंगे।”सुदीप जैन ने कहा कि आवाज को जितना दबाने का प्रयास किया जाएगा, वह उतनी ही अधिक शक्ति के साथ उठेगी। लोकतंत्र में असहमति का सम्मान और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता ही एक स्वस्थ व्यवस्था की पहचान है।
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