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फर्जीवाड़े से परीक्षक बने तो नपेंगे प्रिंसिपल

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यूपी में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए परीक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को बनाया फुलप्रूफ

मेरठ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने आगामी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए परीक्षकों (Evaluators) की नियुक्ति प्रक्रिया को फुलप्रूफ बनाने का निर्देश दिया है। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी गलत विषय में किसी शिक्षक की नियुक्ति न होने पाए और कोई भी अनर्ह (अयोग्य) शिक्षक परीक्षक के रूप में चयनित न हो सके। इसके लिए सभी राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर शिक्षकों का सटीक डेटा ऑनलाइन अपलोड करने का अंतिम मौका दिया गया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि त्रुटिपूर्ण या भ्रामक डेटा अपलोड करने पर संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य सीधे तौर पर उत्तरदायी (जवाबदेह) माने जाएंगे और उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 की कॉपियों के मूल्यांकन और परीक्षा ड्यूटी के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कमर कस ली है। बोर्ड ने इस बार परीक्षकों की नियुक्ति में पूरी तरह पारदर्शिता बरतने और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी को रोकने के लिए बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से प्रधानाचार्यों द्वारा अपलोड किए गए डेटा की गहनता से जांच और सत्यापन कर लें।

शिक्षकों एक सेअधिक विद्यालयों में दर्ज

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अक्सर देखा जाता है कि वित्तविहीन या निजी स्कूलों के शिक्षक एक से अधिक विद्यालयों में अपना विवरण दर्ज करा देते हैं। इस बार यूपी बोर्ड ने तकनीकी रूप से इसे रोकने का पुख्ता इंतजाम किया है। परिषद ने कड़े लहजे में कहा है कि किसी भी दशा में एक शिक्षक का विवरण एक से अधिक विद्यालयों से अग्रसारित (Forward) नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर सॉफ्टवेयर स्तर पर ही इसे पकड़ लिया जाएगा और संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई होगी।

मृतक शिक्षकों के नाम पोर्टल से हटाने के निर्देश

परिषद के सचिव के आज जारी आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि जिन शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है या जिन्होंने विद्यालय छोड़ दिया है, उनका नाम तत्काल पोर्टल से डिलीट करने को कहा गया है। नए नियुक्त स्टाफ का डेटा अनिवार्य रूप से जोड़ना होगा। ऐसे शिक्षक या प्रधानाचार्य जिन्हें पूर्व में किसी गड़बड़ी के कारण परीक्षा कार्य से प्रतिबंधित (डिबार) किया जा चुका है, उन्हें पोर्टल की निर्धारित श्रेणी में स्पष्ट रूप से चिन्हित करना होगा। सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से प्रधानाचार्यों द्वारा अपलोड किए गए डेटा की गहनता से जांच और सत्यापन कर लें। सचिव यूपी बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि किसी विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा पोर्टल पर भ्रामक, अधूरी या त्रुटिपूर्ण सूचना अपलोड की जाती है और उसके आधार पर कोई अयोग्य व्यक्ति परीक्षक नियुक्त हो जाता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाचार्य की होगी। इसे बोर्ड के नियमों का उल्लंघन मानते हुए प्रधानाचार्य के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

5 फरवरी से बोर्ड परीक्षा

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मुख्य परीक्षाएं 5 फरवरी 2027 से शुरू होकर 24 फरवरी 2027 तक चलेंगी। बोर्ड ने सभी स्कूलों को हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक शिक्षकों का पूरा अपडेटेड प्रोफाइल ऑनलाइन लॉक करने का निर्देश दिया है। इस नई व्यवस्था से जहां मेधावी छात्रों की कॉपियों का मूल्यांकन सही और योग्य शिक्षकों के हाथों में सुरक्षित रहेगा, वहीं फर्जीवाड़े के दम पर परीक्षक बनने वाले अनर्ह शिक्षकों पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सकेगी।
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