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अफसरों की दुखती रग पर हाथ

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अफसरों की दुखती रग पर हाथ
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मेरठ। आवास विकास परिषद के जिन अफसरों के खिलाफ आवास विकास परिषद के आला अफसर ने ही मुकदमा दर्ज किया है, उन पर कार्रवाई की बात सुनने को कोई तैयार नहीं है। अफसर तमाम मुद्दों पर बात करने को तैयार हैं, लेकिन जब उनसे सवाल किया जाता है कि सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों पर तमाम पावंदी और कठोर कार्रवाइयां की जा रही हैं। उनके भवनों पर जेसीबी चलाने की बात कही जा रही है तो फिर अवास विकास परिषद के उन अफसरों पर इसीर्ग्त पर कार्रवाई से सिस्टम संभालने वाले अफसर क्यों भाग रहे हें। यदि सूबे में बुलडोजर का ही कानून मानय है तो वो केवल व्यापारियों पर ही लागू क्यों हो, आवास विकास परिषद के अफसरों पर क्यों नही, जबकि अफसरों पर मुकदमा भी लिखा जा चुका है। यही बात तो संयुकत व्यापार संघ के अजय गुप्ता, ललित अमूल, अंकुर गोयल खंदक औरअंकित मनू सदर बार-बार कह रहे हैं। या फिर यह मान लिया जाए कि जो कुछ भी बुरा होना है बस व्यापारी का होना है। अफसर भल ही कितना बड़ा भ्रष्टाचारी क्यों ना हो। कितने ही अवैध निर्माण उन्होंने नाक के नीचे करा डाले हों, लेकिन उन पर कार्रवाई की बात सुनने अफसरों का मंजूर नहीं। लगता है कि यह अफसरों की दुखती रग है और अफसराें की यह दुखती रंग पर अब व्यापारी नेताओं ने हाथ भी रख दिया है।

सेक्टर दो शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के मददागाराें पर शिकंजे कसने में अफसर कोई कोरकसर नहीं उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर अब नया तरीका यह इजाज किया गया है कि किसी भी तरह से पीड़ित व्यापारियां तक पहुंचने वाली मदद रोकी जाए। हैरानी की बात तो यह है कि धरना जब से शुरू हुआ है व्यापारियों की ओर से कोई हिंसा नहीं की गयी है। वो शांति से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, सिस्टम चलाने वालों को उनका यह गांधीवादी तरीका स्वीकार्य नहीं नजर आ रहा है। अब यदि वो गांधीवादी तरीका भी नहीं अपाए तो खुद सिस्टम चलाने वाले ही बात दें कि क्या करें। जो लोग व्यापारियों के मददगार बने हुए हैं उनके खिलाफ तस्करे डाले जा रहे हैं। नोटिस पहुंचने की बात भी सुनने में आ रही है। साहब खूब डलवाइए तस्करें आप तो हाकिम ठहरे। कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन ये ना भूलिए व्यापारी गांधीवादी तरीके पर हैं। केवल मेरठ या देश ही नहीं दुनिया देख रही है कि उनके साथ क्या किया जा रहा है। सेक्टर दो के पैतीस गज के मकानों पर सेटबैक छोड़ने को कहा जा रहा है। जबकि संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष आवास विकास परिषद का बॉयलॉज सामने लागाकर अफसरों का आइना दिखाने का काम कर चुके हैं। लेकिन हाकिम हैं इसलिए हठ पर उतरे हुए हैं। सेंट्रल मार्केट के चवालिस व्यापारियों के साथ जो कुछ किया जा रहा है कि किसी से नहीं छिपा है। शहर कांग्रेस के अध्यक्ष रंजन शर्मा व हिन्दूवादी नेता सचिन सिरोही का कहना है कि अफसर हैं वो कुछ भी कर सकते हैं, तस्करे डलवा सकते हैं, अरेस्ट करा सकते हैं, लेकिन पीड़ित व्यापारियों की मदद से वो पीछे हटने वाले नहीं।

सेंट्रल मार्केट हो या फिर सेक्टर दो के व्यापारी इन पर और इनके मददगारों पर शिकंजा कसने में कोई गुरेज नहीं बरती जा रही है, लेकिन इसी शास्त्रीनगर नई सड़क पर खसरा 6041 पर नगर निगम के कार्यालय के निर्माण को भी तो आवास विकास परिषद के अपैध निर्माण के दायरे में माना है। नोटिस भी भेज, लेकिन आगे की कार्रवाई में हाथ कांप रहे हैं, क्योंकि 6041 पर कथित अवैध निर्माण सरकार हैं। हजारों लाख का खर्चा अब तक किया जा चुका है। आवास विकास के अफसर वहां जेसीबी भेजने या अवैध निर्माण को सील करने की हिमाकत नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे आरटीआई एक्टिवस्ट राहुल ठाकुर ने बताया कि हाईकोर्ट ने नगर निगम से मालिकाना हक के पेपर मांगे हैं, लेकिन कोर्ट के पटल पर कागजात पेश करने के बजाए नगर निगम अफसर बार-बार कोर्ट से समय मांग रहे हैं। लेकिन अगली सुनवाई में समय मांगने के नाम पर निगम के अफसरों को बच कर निकलने का मौका नहीं दिया जाएण्गा। आवास विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शेष 816 संपत्तियों को नोटिस जारी करने की तैयारी की है, जिसमें 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण/कमर्शियल गतिविधि हटाने को कहा गया है। वहीं दूसरी ओर सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों के धरने को समर्थन देने, भीड़ जुटाने या प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने वाले लोगों को पुलिस नेबीएनएसएस की धारा 168 यानि बीएनएसएस सेक्शन 168 के तहत नोटिस जारी किए हैं। इसमें उन लोगों से जवाब मांगा गया है कि क्यों न उन पर कार्रवाई की जाए। पूर्व में 44 संपत्तियों (शो रूम) को सील कर दिया गया था।

 

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