नई दिल्ली। ईरान से जंग छेड़कर अमेरिका ने मुसीबत मोल ले ली है। पेंटागन ने अमेरिका के राष्ट्रपति को जंग को लंबी ना खींचने की सलाह देते हुए हथियारों का जखीरा तेजी से घट जाने को लेकर आगाह किया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में विशेषज्ञ इस जंग को अमेरिका के लिए एक लंबी और महंगी चुनौती मान रहे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, इस संघर्ष पर अब तक लगभग 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। इस लड़ाई में अमेरिका के 19 सैनिक और 1 ठेकेदार मारे गए हैं, तथा 624 सैन्यकर्मी घायल हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी हमले ईरान के परमाणु और पारंपरिक सैन्य कार्यक्रमों को केवल थोड़े समय के लिए ही रोक पाए हैं, और ईरान क्षेत्रीय स्तर पर अपनी गतिविधियों को कम करने के बजाय और फैला रहा है। वहीं दूसरी ओर खाड़ी में अमेरिका के मित्र देश भी ट्रंप से सख्त नाराज हैं।
ईरान ने बनायी लड़ाई में बढ़त
ईरान ने अपनी असममित युद्ध रणनीति (Asymmetric Warfare Strategy), ड्रोन-मिसाइल तकनीक और खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण जलमार्गों पर नियंत्रण के दम पर अमेरिकी सैन्य और आर्थिक बढ़त को भारी नुकसान पहुँचाया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए हमलों के बाद, ईरान ने सीधे पारंपरिक युद्ध लड़ने के बजाय अमेरिका को ऐसे मोर्चों पर घेरा जहाँ उसकी भारी-भरकम सेना और महंगे हथियार बेअसर साबित हुए। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। ये सभी यूएस के फौजी ठिकाने हैं। दुनिया भर में ईधन यानि कच्चा तेल और गैस पहुंचाने का सबसे प्रमुख मार्ग स्ट्रेट होर्मूज ईरान के कब्जे में है। अमेरिका चाह कर भी ईरान से स्ट्रेट होर्मूज आजाद नहीं करा पाया। डोनाल्ड ट्रंप ने नॉटो व यूरोपियन देशों से स्ट्रेट होर्मूज मुक्त कराने के लिए मदद की गुहार लगायी, लेकिन ईरानी की मिसाइल पावर के चलते कोई भी मुल्क डोनाल्ड ट्रंप की मदद को राजी नहीं हुआ। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस आपूर्ति मार्ग यानि स्ट्रेट हाेर्मूज को व्यावसायिक जहाजों पर हमले करके प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया।
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