नई दिल्ली। खुद को सुपर पावर समझने वाले यूएस का हथियारों का जखीरा खत्म होने की कगार पर है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और पेंटागन ने राष्ट्रपति ट्रम्प को सलाह दी है कि लगातार 13 रातों तक चली भारी बमबारी के कारण अमेरिकी सेना के हथियारों और उन्नत मिसाइलों (जैसे पेट्रियट एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर) का भंडार कम हो रहा है। चेतावनी दी गयी है कि यदि ईरान दोबारा बड़े जवाबी हमले करता है, तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों की रक्षा के लिए इन मिसाइलों का स्टॉक बचाकर रखना जरूरी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि यह जंग और खिंचती है, तो सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों के तेल ठिकानों पर ईरानी हमलों का खतरा बढ़ सकता है। लड़ाई रोकने को लेकर ईरान और अमेरिका पर भारी दवाब है। यही वजह है जो दोनों ही देशें ने एक दूसरे पर अचानक हमले रोक दिए हैं। बीते तीन दिनों में एक दूसरे पर हमले नहीं किए गए हैं। दोनों के बीच मध्यस्थता कर रहे कतर, ओमान और पाकिस्तान जैसे देश पर्दे के पीछे से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत शुरू कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
एक दूसरे पर हमले ना करने पर सहमत
दोनों देश एक दूसरे पर हमले ना करने पर सहमत बताए जा रहे हैं। हालांकि अमेरिकी दावों के मुताबिक ईरान ने खुद आगे बढ़कर हमलों को रोकने और बातचीत करने की इच्छा जताई है, जिसके बाद ईरान ने ‘जैसे को तैसा’ (Attack for Attack) की रणनीति के तहत अमेरिका द्वारा हमला न किए जाने पर अपने जवाबी हमले भी रोक दिए हैं। हॉर्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है। हमलों के रुकते ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
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