बनाने के बजाए रात के अंधेरे में तोड़े जा रहे हैं पब्लिक टॉयलेट, आबू नाले की चौड़ाई कर दी है कम, बारिश के मौसम में डूबेंगे मकान दुकान
मेरठ। स्वच्छ भारत अभियान पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्टों की फेरिस्त में सबसे टॉप पर माना जाता है। इसके ब्रांड एम्बेसेडर भी पीएम स्वयं है। स्वच्छ भारत अभियान पीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के बावजूद कुछ मोदी सरकार के ही कुछ अफसर इस शानदार अभियान को पलीता लगाने के लिए सरकारी टॉयलेट खत्म करने पर तुले हुए हैं। रात के अंधेरे में कुछ अफसर सरकारी टॉयलेट हटवा रहे हैं। इससे पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को तो पलीता लगाया जा ही रहा है, साथ ही हजारों लोगों से उनकी जनसुविधा भी छीन ली जा रही है। जो लोग प्रात: इस टाॅयलेट का यूज करते थे अब वो खुले में शौच से निवृत्त होने के लिए मजबूर होंगे। ऐसा किस वजह से किया गया यह तो कैंट बोर्ड के अफसर ही बता सकते हैं। हालांकि आरोप लग रहे हैं कि ऐसा बड़े और निजी हितों को साधने के लिए किया जा रहा है। इसके केंद्र में इनफिनिटी मॉल के लिए कैंट अफसरों द्वारा सुविधा जुटाए जाने के आरोप लग रहे हैं।
वोल्गा पुल और मिस्टर टॉक वाले पुल के वर्तमान अलाइनमेंट
आबू नाले की पटरी चौड़ा कर पार्किंग बनाने और लगभग 25-30 वर्ष पुराने सार्वजनिक शौचालय को अचानक रातोंरात हटाने के फैसले ने स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों में भारी रोष पैदा कर दिया है। आसपास के लोगों की माने तो नवनिर्मित कॉम्प्लेक्स के लिए आबू नाले की पटरी को चौड़ा कर पार्किंग व्यवस्था की जा रही है। । इससे नाले की मूल चौड़ाई स्पष्ट रूप से कम हो गई है। इसकी पुष्टि आबू नाले पर स्थित वोल्गा पुल और मिस्टर टॉक वाले पुल के वर्तमान अलाइनमेंट से आसानी से की जा सकती है। पुराने और वर्तमान अलाइनमेंट की तुलना से साफ दिखता है कि नाले की जल निकासी क्षमता प्रभावित हुई है। नागरिकों का कहना है कि नाले की चौड़ाई कम करना बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ाता है। एक्ट के तहत सार्वजनिक नालों का मुक्त प्रवाह सुनिश्चित करना अफसरों की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां उल्टा किया गया।
कैंट बोर्ड अफसरों के प्रति जनता में रोष कथित तौर पर इनफिनिटी मॉल के हितार्थ नाले की पटरी को खत्म कर जहां पक्की पार्किंग बनायी जा रही है उसी स्थान पर कोने पर 25-30 वर्षों से स्थित सार्वजनिक शौचालय को अचानक रातोंरात हटा दिया गया। बाजार क्षेत्र में अब कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं बचा है। इससे पहले जैन स्टील के सामने वाला शौचालय भी वर्षों से ताला लगाकर बंद पड़ा था। दुकानदारों का आरोप है कि जन सुविधाओं को नजरअंदाज कर निजी व व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। सवाल है कि इनफिनिटी मॉल के लिए क्या कथित पार्किंग बनाने के लिए नाले की चौड़ाई कम करना और पुराने शौचालय को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना जायज है।
अफसर कठघरे में
आबूनाले की चौड़ाई कम कर दिए जाने व नाला पटरी खत्म कर पार्किंग की तैयारियों के बाद सवाल पूछ जा रहा है कि नाले की चौड़ाई कम करने का तकनीकी और कानूनी आधार क्या है, ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि जनसुविधा का एक मात्र साधन नाले पर बना टॉयलेट रातों रात हटा दिया गया। इसको हटाए जाने से पहले हजारों लोगों की जनसुविधा का माकूल इंतजाम क्यों नहीं किया गया। बाजार में वैकल्पिक शौचालय की व्यवस्था ना किए जाने की जिम्मेदारी कौन लेगा या यह मान लिया जाए कि जन सुविधाओं से ज्यादा अब कैंट बोर्ड अफसर निजी व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह मामला बल्कि आम नागरिकों के लिए सुविधा और उनके अधिकार से जुड़ा है।
इन सवालों का चाहिए जबाव
चैपल स्ट्रीट के जिस मॉल के लिए पार्किग की व्यवस्था के आरोप लगाए जा रहे हैं उसको लेकर कैंट बोर्ड प्रशासन से भी सवाल पूछे जा रहे हैं जिनमें प्रस्तावित जगह के निर्माण के मूल्यांकन का प्रस्ताव बोर्ड कौन सी बैठक में पास किया गया और उसमें कौन-कौन मौजूद रहे। जिस जगह इसको विकसित किया जा रहा है उस स्थान पर मॉल के अलावा कोई दूसरी संपत्ति या उपभाेक्ता नहीं जो इससे लाभान्वित होगा तो क्या फिर यह मान लिया जाए कि मॉल स्वामी को लाभान्वित करने के लिए ही यहां पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। इस कार्य को करने वाली कार्यदायी संस्था कौन है और आंकलन कुल कीतना व्यय होगा। जिस टॉयलेट को तोड़ गया है उससे संबंधित प्रस्ताव बोर्ड की कौन सी बैठक में पास हुआ। सबसे महत्वपूर्ण नाले की पटरी का उपयोग पार्किंग के लिए बनाए जाने वाले स्थान के रूप में किए जाने के बाद इस स्थान पर नाले की चौड़ाई प्रभावित हुई है। नाले की चौड़ाई को प्रभावित करने से पूर्व क्या संबंधित विभागों की एनओसी ली गयी है। ये तमाम प्रस्ताव जिस बैठक में पारित किए गए वह कब हुई और उस बैठक में कौन-कौन जनप्रतिनिधि मौजूद थे। यह और इसके जैसे तमाम सवाल है जिनकी जानकारी केवल कैंट बोर्ड के उच्च पदस्थ अधिकारी ही दे सकते हैं।
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