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चौतरफा घिरी है मोदी सरकार

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सीजेपी और विपक्ष के आंदोलन के बीच अमेरिका से जारी की गयी हरदीपपुरी की फोटो के बाद चौतरफा दवाब

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और सीजेपी (CJP) का आंदोलन और दूसरी तरफ अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा केंद्रीय मंत्री हार्डदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) और जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) की कथित वन-ऑन-वन (अकेले में) मुलाकात की तस्वीरें जारी होने से मोदी सरकार पर चौतरफा राजनीतिक दबाव बेहद बढ़ गया है। यह दोहरा संकट सरकार की छवि और चुनावी विश्वसनीयता दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहा है, जिससे निपटने में सरकार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस व INDIA गठबंधन) का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। मतदाता सूची (वoter List) में कथित गड़बड़ी और ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शनों के बाद अब विपक्ष नवंबर महीने में राजधानी दिल्ली में एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है।

बढ़ा सियासी पारा, कई नेता हिरासत में

अक्टूबर महीने की शुरुआत से ही दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। बीते दिनों जंतर-मंतर पर CJP और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके सहित कई कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया था। पुलिस की सख्त पाबंदियों के बावजूद प्रेस क्लब और जंतर-मंतर पर नागरिक समाज का विरोध प्रदर्शन रुक-रुक कर जारी है। इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिसिया कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है।

नवंबर में ‘महाआंदोलन’ की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस लड़ाई को संसद से सड़क तक ले जाने की तैयारी में है। 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल रैली आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही संसद मार्च और ‘मॉक संसद’ (Mock Parliament) के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है। CJP ने भी घोषणा की है कि वे इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी दौरों के जरिए युवाओं और आम जनता को जागरूक करेंगे।

बचाव के सभी रास्ते बंद

चुनाव आयोग और सरकार ज्ञानेश कुमार के मामले में तो यह तर्क दे सकते हैं कि वोटर लिस्ट का काम पूरी तरह कानूनी है, लेकिन हरदीप पुरी की वायरल तस्वीरों और अमेरिकी अदालती दस्तावेजों (62 ईमेल के आदान-प्रदान का दावा) पर केवल “चुप्पी साधना” सरकार के लिए भारी पड़ रहा है।

सरकार के लिए भारी मुसीबत

यह स्थिति मोदी सरकार के लिए अल्पावधि (Short-term) में बहुत बड़ी राजनीतिक सिरदर्दी है। यदि विपक्ष इन दोनों मुद्दों को आपस में जोड़कर यह स्थापित करने में सफल रहा कि “सरकार आंतरिक रूप से लोकतांत्रिक संस्थाओं से समझौता कर रही है और बाहरी मोर्चे पर कमजोर पड़ रही है,” तो सरकार को रक्षात्मक रुख अपनाना होगा। हालांकि, सरकार के पास संसद में मजबूत बहुमत है, इसलिए सीधे तौर पर सरकार गिरने जैसा कोई संकट नहीं है, लेकिन नैतिक और छवि के मोर्चे पर यह मोदी सरकार के लिए अब तक के सबसे असहज करने वाले दौर में से एक है।
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