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कितना तोड़ा गया जायजा लेने पहुंचे अपर सचिव

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कितना तोड़ा गया जायजा लेने पहुंचे अपर सचिव
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21 सितंबर को फिर होनी है सुप्रीमकोर्ट में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण की सुनवाई, अपर मुख्य सचिव नीरज शुक्ला पहुंचे मेरठ

मेरठ। आवास विकास के सेटबैक नोटिसों को लेकर सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेरठ के आवास विकास के अफसरों ने कहां तक काम किया है कितनी तोड़फोड़ की गयी इसका जायजा लेने के लिए अपर मुख्य सचिव नीरज शुक्ला मेरठ पहुंचे। उन्होंने आवास विकास के उच्च पदस्थ अफसरों के साथ गाड़ी से ही प्रभावित इलाके का निरीक्षण कर जायजा लिया। वहीं दूसरी ओर आवंटियों या कहें पीड़ितों का कहना है कि वो लोग इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें अपर सचिव से मुलाकात का मौका नहीं दिया गया। इससे पहले खबर आयी थी कि आयुक्त आवास पी गुरूमूर्ति मेरठ आ रहे हैं, लेकिन उनके बजाए अपर सचिव आवास पहुंचे। वहीं दूसरी ओर माना जा रहा है कि यह सारी कवायद सुप्रीमकोर्ट में 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई को लेकर की जा रही है। सुप्रीमकोर्ट में आवास विकास के अफसरों को आदेश के अनुपालन में कृत कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है। 14 जुलाई में जो सुनवाई हुई थी उसके बाद यह मामला एकाएक गरमा गया था। और शासन के तमाम आला अफसर मेरठ आए थे। राहत भरी बात तो अफसरों ने खूब की लेकिन अंत में सुप्रीमकोर्ट के आदेशों का पालन अक्षरत: किया जाएगा, यह कहकर सारी उम्मीदों पर पानी भी फेर दिया।

यह हैं सुप्रीम के आदेश

बीते अगस्त माह में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर दायर की गयी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने ध्वस्तीकरण के मामले में कोई राहत नहीं दी गई है। दरअसल वो सुनवाई व्यापक पैमाने पर की गयी थी, उसका दायरा केवल सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर तक सिमटा हुआ नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को 44 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। परिषद की ओर से आठ अप्रैल को इन 44 भवनों को सील किया गया था। ये मूल रूप से आवासीय संपत्तियां हैं, जिनमें स्कूल, नर्सिंग होम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मिठाई की दुकान समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। परिषद की ओर से विभिन्न योजनाओं में सर्वे भी कराया जा रहा है। सर्वे के जरिए यह देखा जा रहा है कि संबंधित संपत्तियों के मूल स्वरूप में किस तरह के बदलाव किए गए हैं और कहां अवैध निर्माण किया गया है। प्रकरण में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होनी है। आदेश में कहीं भी सेंट्रल मार्केट का उल्लेख नहीं है और अवैध निर्माण को मूल स्वरूप में लाने के आदेश पहले से लागू हैं।

ये होगा 21 सितंबर को

21 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मुख्य रूप से अवैध निर्माणों और सेटबैक (इमारत के चारों तरफ छोड़ी जाने वाली खाली जगह) को हटाने के आदेश पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की प्रगति (Status/Compliance Report) पर सुनवाई करेगा। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और मेरठ प्रशासन को कोर्ट के आदेशानुसार की गई ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश करना होगा। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सील किए गए 44 मुख्य व्यावसायिक भवनों और लगभग 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को पूरी तरह हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट यह देखेगा कि इस पर कितना अमल हुआ है। स्थानीय व्यापारियों ने हाल ही में प्रशासन से वार्ता कर 21 सितंबर तक बुलडोजर कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगवाई है। इस दिन व्यापारियों के वकील कोर्ट के सामने पुनर्विचार, आजीविका के संकट और दुकानों के लिए किसी वैकल्पिक समाधान या राहत की अंतिम गुहार लगाने का प्रयास कर सकते हैं।
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