सरकारी महकमों में 20 साल पुराने वाहन तो ट्रांसपोर्टरों पर रोक क्यों
सरकारी महकमों में 20 साल पुराने वाहन तो ट्रांसपोर्टरों पर रोक क्यों
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सरकार की स्क्रेप नीति जब ट्रांसपोर्टरों पर लागू की जा रही है तो उन सरकारी महकमों पर क्यों नहीं, राहत के लिए प्रदेश के परिवहन मंत्री से मिले मेरठ के ट्रांसपोर्टर, सौंपा ज्ञापन
मेरठ। सरकार की स्क्रेप नीति जब ट्रांसपोर्टरों पर लागू की जा रही है तो उन सरकारी महकमों पर क्यों नहीं जहां दस से बीस साल पुराने डीजल वाहनों को संचालित किया जा रहा है। दिल्ली एनसीआर के तमाम ट्रांसपोर्टरो पर आरटीओ अफसर लगातार प्रेशर बनाए हुए हैं। यह स्थिति उन हजारों छोटे एवं मध्यम ट्रांसपोर्टरों के लिए अत्यंत कठिन एवं चिंताजनक है, जो वर्षों से अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से परिवहन व्यवसाय चला रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों की ऐसी ही समस्याओं को लेकर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा के नेतृत्व में ट्रांसपोर्टरों का एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से लखनऊ में मिला और ज्ञापन दिया।
स्क्रैप नीति की समीक्षा पर बल
गौरव शर्मा ने योगी सरकार के परिवहन मंत्री को बताया कि एनसीआर क्षेत्र में डीजल कमर्शियल वाहनों के लिए 10 वर्ष तथा पेट्रोल वाहनों के लिए 15/17 वर्ष की आयु-सीमा से संबंधित प्रतिबंध लंबे समय से प्रभावी हैं। इस संबंध में ट्रांसपोर्टर पीएम मोदी, एनजीटी एवं संबंधित विभागों को समस्याओं से अवगत करते रहे हैं। मेरठ एनसीआर में सम्मिलित होने के कारण यहां भी 10 वर्ष पुराने डीजल कमर्शियल वाहनों को स्क्रैप नीति के अंतर्गत लाने की कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में आरटीओ द्वारा ट्रांसपोर्टरों को इस संबंध में सूचना प्राप्त हुई है। यह स्थिति उन हजारों छोटे एवं मध्यम ट्रांसपोर्टरों के लिए अत्यंत कठिन एवं चिंताजनक है, जो वर्षों से अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से परिवहन व्यवसाय चला रहे हैं। महोदय, वर्तमान परिस्थितियों में डीजल, टोल टैक्स, बीमा, सरकारी कर, जीएसटी, रखरखाव एवं अन्य परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं एवं जनसामान्य की जरूरत का सामान उनके द्वार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। गौरव शर्मा ने परिवहन मंत्री से आग्रह किया कि केवल वाहन की आयु को आधार बनाकर कार्रवाई करने के बजाय वाहन की वास्तविक फिटनेस एवं प्रदूषण स्तर को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाए।
ये हैं मांगें
परिवहन मंत्री को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों एवं संस्थानों में 10 से 20 वर्ष पुराने वाहन अभी भी संचालित होते दिखाई देते हैं। एफसीआई, गन्ना विभाग आदि में भी परिवहन कार्य के लिए पुराने वाहनों का उपयोग किया जाता है। यदि पुराने वाहनों से प्रदूषण एवं पर्यावरण को वास्तविक खतरा है, तो नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए । शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में 15-20 वर्ष पुराने निजी वाहन एवं दोपहिया वाहन भी बड़ी संख्या में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में केवल कमर्शियल वाहनों को लक्ष्य बनाना ट्रांसपोर्टर समुदाय के लिए असमान व्यवहार जैसा प्रतीत होता है। शहर एवं जनपद में बड़ी संख्या में अवैध / डग्गामार वाहन खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इनसे न केवल प्रदूषण एवं यातायात संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, बल्कि वैध टैक्स एवं परमिट देकर व्यवसाय करने वाले ट्रांसपोर्टरों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में 25-30 वर्ष पुराने डीजल जनरेटर तक उपयोग में हैं। यदि प्रदूषण नियंत्रण इसका मूल उद्देश्य है तो ऐसे सभी स्रोतों पर भी समान एवं प्रभावी कार्रवाई अपेक्षित है। जो कमर्शियल वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप फिटनेस रखते हैं तथा जिनके पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र ( क्कष्ट) है, उन्हें केवल आयु पूरी होने के आधार पर तत्काल स्क्रैप किए जाने से ट्रांसपोर्टर को भारी आर्थिक क्षति होती है। ऐसे वाहनों की वास्तविक फिटनेस एवं प्रदूषण स्तर को भी नीति में उचित महत्व दिया जाना चाहिए। ऐसे वाहनों के संबंध में फिटनेस, प्रदूषण स्तर एवं सड़क पर सुरक्षित संचालन की स्थिति को भी आधार बनाया जाए। यदि आयु-आधारित स्क्रैप नीति लागू की जाती है तो इसे सरकारी, निजी एवं कमर्शियल – सभी प्रकार के वाहनों पर समान रूप से लागू किया जाए। डग्गामार एवं अनधिकृत वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए, जिससे वैध रूप से टैक्स एवं अन्य शुल्क देने वाले ट्रांसपोर्टरों को राहत मिल सके। ट्रांसपोर्टरों को नए वाहन खरीदने के लिए पर्याप्त समय एवं व्यावहारिक संक्रमण अवधि प्रदान की जाए।
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