नई दिल्ली ब्रिक्स घोषणा पत्र में अमेरिका और इजरायल का नाम लिए बगैर अमेरिका ओर इजरायल को खूब खरीखोटी सुनायी
नई दिल्ली। नई दिल्ली ब्रिक्स घोषणा पत्र में अमेरिका और इजरायल का नाम लिए बगैर अमेरिका ओर इजरायल को खूब खरीखोटी सुनायी गयी। घोषणा पत्र पर नई दिल्ली में ईरानी राष्ट्रपति की मौजूदगी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की छाया साफ नजर आती है। इसराइल का नाम लिए बगैर फ़लस्तीन और लेबनान का ज़िक्र किया गया है और मध्य-पूर्व के तनावपूर्ण हालात के शांतिपूर्ण हल की अपील की गई। दिलचस्प ये था कि अमेरिका के साथ युद्ध में एक दूसरे के विपरीत दो छोर पर खड़े ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी मध्य-पूर्व के हालात शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की अपील करने वाले देशों में शामिल थे। ब्रिक्स घोषणा पत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी टैरिफ़ का नाम नहीं लिया गया है लेकिन कहा गया है कि कई देशों को ‘अन्यायपूर्ण और एकतरफ़ा संरक्षणवादी कदमों’ से नुकसान हो रहा है। घोषणा-पत्र में मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर “गहरी चिंता” जताई गई है. ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल देशों की ओर से पहले फ़लस्तीन और फिर अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध से घिरे मध्य-पूर्व के संकट को अधिकतम संयम और कूटनीति के ज़रिए सुलझाने की अपील की गई। ग़ज़ा और कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाकों की मानवीय स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। ग़ज़ा में सीजफ़ायर बनाए रखने और बगैर किसी बाधा के मानवीय मदद पहुंचाने की अपील की गई।
टैरिफ की निंदा
घोषणापत्र में सीधे तौर पर आर्थिक प्रतिबंधों, सेकेंडरी सैंक्शंस और भारी-भरकम टैरिफ की कड़ी निंदा की गई है। इन प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताने से रूस और ईरान जैसे देशों को बड़ा कूटनीतिक समर्थन मिला है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी वाले ठिकानों पर हमलों को लेकर जताई गई चिंता को परोक्ष रूप से अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है। घोषणापत्र में इज़राइल से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करे और अपनी सेना को वहां से हटाए। साथ ही गाजा में हिंसा और फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया गया है।ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) और फिलिस्तीनियों के ‘वापसी के अधिकार’ का समर्थन किया है, जो इज़राइल को असहज करने वाला है।
बहु-आयामी विदेश नीति
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने इज़राइल के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी होने के बावजूद ब्रिक्स मंच पर इस संतुलित और कड़े रुख पर सहमति जताई है, जो ग्लोबल साउथ (Global South) के हितों और बहु-आयामी विदेश नीति को दर्शाता है। इस ने पश्चिम एशिया के मुद्दों पर आम सहमति का एक मध्यम मार्ग निकाला है।
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