मेरठ। दावे ट्रिपल इंजन सरकार के और हालत इतनी खराब की लोगों को शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं। वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों और अफसरों की बात करें मेरठ के प्रथम नागरिक यानि मेयर हरिकांत अहलूवालियां को इस वार्ड की बदहाली दिखाने के लिए पार्षद रामपाल दो बार लाकर मौके पर मुआयना तक करा चुके हैं। मेयर आए तो उनके साथ अफसरों का पूरा अमला भी आया, लेकिन इस आवाजाही के बाद भी जयभीम नगर की जिन समस्याओं के लिए मेयर को बुलाया गया था वो जहां की तहां मुंह बाए खाड़ी हैं। यहां साफ कर दें कि महानगर का वार्ड 13 मेडिकल जयभीम नगर स्वतंत्र प्रभार मंत्री डा. साेमेन्द्र तोमर की विधानसभा क्षेत्र में आता है। वार्ड पूरी तरह से भाजपा मय है, लेकिन लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब ट्रिपल इंजन का दावा भाजपा के नेता कर रहे हैं तो उनकी इलाके की जनसमस्याएं क्यों नहीं हल नहीं हो पा रही हैं। इसकी दो ही वजह हो सकती हैं या तो नेताओं की ओर से शिद्दत से कोशिश नहीं की जा रही है या फिर सिस्टम में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। हालांकि अच्छी बात यह है कि इस वार्ड के लोगों को अपने पार्षद रामपाल सिंह से किसी प्रकार का शिकवा या शिकायत नहीं है। लोगों ने बताया कि जो भी काम हुए हैं वो पार्षद रामपाल सिंह की बदौलत हो सके हैं। मेयर हरिकांत अहलूवालिया आए तो उनका आना भी पार्षद की वजह से मुमकिन हो सका। यह बात अलग है कि मेयर साहब काम नहीं करा सके।
बारिश के नाम से लगता है डर
लाेगों ने बताया कि इस वार्ड में सबसे बड़ी मुसीबत रास्तों की है। रास्ते कच्चे हैं। या अध बने हैं। बारिश में गलियां तालाब बन जाती हैं। दूषित पानी से लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। आधे-अधूरे निर्माण लोगों की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई मकानों की नींव तक जलभराव से कमजोर पड़ गई है। आधे रास्ते बनाकर छोड़ दिए जाते हैं। सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेरों से पूरे इलाके में गंदगी और बदबू फैली मिली। इलाके के ट्रांसफॉर्मर के आसपास झाड़ियां उग आई हैं, जिससे बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। कई खाली प्लॉटों में जलभराव और कूड़ा जमा मिला, जहां मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। वार्ड का मुख्य मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुका है और बारिश में यहां चलना मुश्किल हो जाता है। वहीं बिजली के खंभों पर लगे बॉक्स टूटे मिले और कई स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। वार्ड के कई हिस्सों में सड़क और नाली निर्माण शुरू तो हुआ, लेकिन पूरा नहीं कराया गया। कहीं आधी सड़क बनी है तो कहीं अधूरी नालियां छोड़ दी गई हैं। मुख्य मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन हादसे होते हैं। बच्चों को स्कूल और लोगों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी होती है।
शुद्ध पेयजल की दरकार
इस इलाके की बड़ी समस्या शुद्ध पेयजल की है। लोगों का कहना है कि पेयजल के नाम पर जो पानी सप्लाई किया जा रहा है वह गंदगा है बदबूदार है। पीने लायक नहीं। कई बार पानी के सेंपल अफसरों को भेजे जा चुके हैं। पानी की समस्या को देखने के लिए ही मेयर आए थे, लेकिन उन्होंने भी किया कुछ नहीं। इतना ही नहीं पानी या तो समय पर नहीं आता और जब आता है तो बदबूदार और दूषित होता है। लोगों का आरोप है कि गंदा पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ चुके हैं। वार्डवासियों का कहना है कि पीने का साफ पानी भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लोगों का कहना है कि पीने का शुद्ध पानी सबसे पहले मुहैय्या कराया जाना चाहिए।
प्रमुख समस्याएं
लोगों ने बताया कि इस इलाके की प्रमुख समस्याओं में कई हिस्सों में सड़क और नाली निर्माण शुरू तो हुआ, लेकिन पूरा नहीं कराया गया। कहीं आधी सड़क बनी है तो कहीं अधूरी नालियां छोड़ दी गई हैं। मुख्य मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन हादसे होते हैं। बच्चों को स्कूल और लोगों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी होती है। बदबूदार और गंदा पानी आने से बीमारियां बढ़ रही हैं। अधूरा नाला निर्माण और जाम नालों के कारण पूरे इलाके में जलभराव होता है। कई गलियां गड्ढों में तब्दील हैं, जिससे हादसे हो रहे हैं। कई गलियां गड्ढों में तब्दील हैं, जिससे हादसे हो रहे हैं। इन समस्याओं का सबसे पहले समाधान कराएं मेयर। वहीं दूसरी ओर पार्षद रामपाल सिंह बताते हैं कि पेयजल समस्या है। इसको लेकर लिखा जा चुका है। वार्ड की सड़कों की समस्या काम स्वीकृत होते ही दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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