मेरठ। वक्फ संपत्तियां दर्ज करने में मेरठ जिला बुरी तरह से पिछड़ गया है। इसके बाद यहां महकमे के अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। पूछा जा रहा है कि ऐसी क्या वजह रही जो शासन की मंशा के अनुसार महकमे के अफसर जो डाटा मांगा गया था उसको दर्ज नहीं कर सके। ऐसा होने से महकमे से संबंधित शासन में बैठे अफसरों का कामकाज भी प्रभावित होता है। वहीं दूसरी ओर बता गया है कि दस्तावेज़ों में भारी विसंगतियां, खसरा-प्लॉट नंबर मेल न खाने और भूमि संबंधी अनियमितताओं के कारण मेरठ सहित पूरे यूपी में हज़ारों वक्फ दावों को खारिज कर दिया गया है। भूमि के मालिकाना हक और राजस्व रिकॉर्ड में अंतर मिलने के कारण मेरठ की कई संपत्तियों का पंजीकरण रद्द हो गया है।
फर्जीवाड़े के मामले
मेरठ (विशेषकर कंकरखेड़ा, कासमपुर और अब्दुल्लापुर) में भूमाफियाओं द्वारा वक्फ बोर्ड की करोड़ों-अरबों रुपये की जमीनों के फर्जी बैनामे करने और अवैध कब्जे के कई मामले सामने आए हैं, जिस पर पुलिस/प्रशासन ने सख्त मुकदमे भी पूर्व में दर्ज किए हैं। प्रदेश भर में करीब 31,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन तकनीकी त्रुटियों के चलते रद्द किया गया है, जिसका सीधा असर मेरठ के वक्फ रिकॉर्ड पर भी पड़ा है।
शासन से जारी की गयी प्रोग्रेस रिपोर्ट
मेरठ। केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पंजीकरण के लिए संचालित उम्मीद पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा में प्रदेश भर में 1 लाख 52 हजार 867 संपत्तियां दर्ज हो सकी हैं। उम्मीद पोर्टल के यह आंकड़े उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा जारी प्रोग्रेस रिपोर्ट में जारी किए गए हैं। पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के मामले में मेरठ पिछड़ गया है। प्रोग्रेस रिपोर्ट के अनुसार मेरठ में कुल 4259 संपत्तियों में से सिर्फ 2548 संपत्तियों को ही अप्रूवल मिला है, जबकि 900 संपत्तियां रिजेक्ट कर दी गई हैं। उधर प्रदेश के सभी 75 जिलों की बात करें तो 1 लाख 52 हजार 867 संपत्तियां उम्मीद पोर्टल पर दर्ज हुई जिनमें से 1 लाख 3 हज़ार 542 संपत्तियों को अप्रूवल दिया गया जबकि 29747 संपत्तियां विभिन्न कारणों से रिजेक्ट कर दी गईं। प्रोग्रेस रिपोर्ट के अनुसार शेष संपत्तियां जांच और अनुमोदन की विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत लंबित हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिन वक्फ संपत्तियों को सबसे ज्यादा अप्रूवल मिला है उनमें मुजफ्फरनगर 3114, बरेली 3053, रामपुर 2809, बिजनौर 2787, सहारनपुर 2528 और मेरठ 2548 शामिल हैं। हालांकि मेरठ अन्य जिलों के मुकाबले पिछड़ा हुआ है। यदि शिया वक्फ संपत्तियों की बात करें तो यहां स्थिति थोड़ी बेहतर है। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सभी 75 जिलों में 8156 वक्फ संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज किया गया और इनमें से 4751 संपत्तियों को अनुमोदन मिला और 2059 संपत्तियां रिजेक्ट की गईं। 316 संपत्तियां चेकिंग स्तर पर लंबित हैं जबकि 26 मामले अप्रूवल स्तर पर विचाराधीन हैं। बोर्ड से जुड़े सूत्रों के अनुसार वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के तहत जो संपत्तियां रिजेक्ट हुई हैं या उम्मीद पोर्टल पर दर्ज तो हुई हैं लेकिन अप्रूव नहीं हुई या किसी कारण पेंडिंग है तो उसके लिए वक्फ ट्रिब्यूनल में अर्ज़ी दायर करनी होगी। इसके बाद वक्फ ट्रिब्यूनल की गाइडलाइन के अनुसार ही संबंधित संपत्तियों को अप्रूव अथवा रिजेक्ट किया जाएगा।
Leave a comment