नई दिल्ली। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना (US Navy/CENTCOM) के हमले में मारे गए भारतीयों की पहचान कर ली गयी है। यह हमला तेल टैंकर ‘एमटी मारिवक्स’ (M/T Marivex) को निशाना बनाकर किया गया था। इसमें जिसमें 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नाकाबंदी तोड़ने के कारण जहाज के इंजान और स्टीयरिंग रूम पर सटीक मिसाइल से हमला किया। जिसके बाद यह जहाज डूबने लगा। एक मुस्लिम देश ओमान ने अमेरिकी नौसेना के हमले का शिकार हुए भारतीयों की मदद की। पहले खबर आयी थी कि दो भारतीय लापता भी हैं। लेकिन अब खबर है कि मुस्लिम देश ओमान के तटरक्षक बलों द्वारा सभी 24 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद, भारतीय राजनयिकों ने नई दिल्ली में अमेरिकी मिशन के उप प्रमुख को तलब किया है। इसके साथ ही क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अन्य हमलों में दो भारतीय नाविकों की जान जाने और एक के लापता होने की भी खबर है।
मृतकों की पहचान
पहचान हुई हमले में हताहत हुए तीनों भारतीय नाविकों की पहचान फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया यानि FSUI ने कर ली हीै। सबसे बुरी खबर यह है कि अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो चुकी है। इनकी पहचान कर ली गयी है। इनमें आदित्य शर्मा (डेक कैडेट) – यह हिमाचल प्रदेश के रहने वाले थे। शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) – यह उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे और पटनाला सुरेश (चीफ इंजीनियर) – यह आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे (शुरुआत में इन्हें लापता बताया गया था, लेकिन अब इनकी भी मृत्यु की पुष्टि हो गई है)। तीनों दिवंगत भारतीय नाविकों—आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश—के पार्थिव शरीरों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने (Repatriation) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, हालांकि सरकार की ओर से शव लाने के लिए कोई निश्चित तारीख नहीं बतायी गयी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी राजदूत को तलब कर इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चूंकि यह एक सैन्य हमले से जुड़ा संवेदनशील मामला है, इसलिए स्थानीय ओमान प्रशासन और दूतावास की कागजी कार्रवाई पूरी होते ही (संभावित रूप से अगले 2 से 4 दिनों के भीतर) शवों को विशेष विमान या वाणिज्यिक उड़ान से भारत लाया जा सकता है।
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