Home मेरठ अपना ही प्रस्ताव भूले बैठे हैं नगर निगम के अफसर
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अपना ही प्रस्ताव भूले बैठे हैं नगर निगम के अफसर

अपना ही प्रस्ताव भूले बैठे हैं नगर निगम के अफसर

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अपना ही प्रस्ताव भूले बैठे हैं नगर निगम के अफसर
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मेरठ। नालों की सफाई में सहूलियत के लिए आठ साल पहले पास हुए प्रस्ताव को नगर निगम बिसराए बैठा है। 17 मार्च साल 2018 को हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में तत्कालीन पार्षद अब्दुल गफ्फार ने इस आश्य का प्रस्ताव रखा था। उनके उस प्रस्ताव पर सभी दलों के पार्षदों ने सहमति जता दी थी, लेकिन यह बात अलग है कि बोर्ड बैठक में पारित उक्त प्रस्ताव को नगर निगम प्रशासन भुलाए बैठा है। इसका नतीजा यह हुआ कि महानगर के ज्यादातर नालों पर खासतौर बड़े नालों पर जिनमें ओडियन नाला खासतौर से शामिल है और आरटीओ नाला खासतौर से शामिल हैं, जहां पांच दिन पहले पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार व पार्षद फजल करीम के आग्रह पर नगरायुक्त निरीक्षण के लिए आरटीओ पुल पहुंचे थे। ऐसे तमाम नालों पर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं।

नाला पटरी पर बना लिए मकान

नालों की दोनों ओर की पटरियों की हालात कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों ने नालों की पटरी पर दोनों ओर पक्के मकान बना लिए हैं। लिंटर डाल लिए हैं जिसकी वजह से तमाम नाले तंग हो गए हैं। ऐसे तंग की वहां पर अब सफाई कराया जाना आसान कार्य नहीं रह गया है। नगर निगम यदि इन नालों की सफाई भी भी कराना चाहे तो वहां इतना रास्ता अब नहीं बचा है कि जेसीबी या फिर पोर्कलेन या नाला सफाई की ऐसी ही दूसरी मशीनों को वहां उतारा जा सके। नालों में सफाई मशीनों का उतारा जाना तो दूर की बात रही, वहां इतना भी रास्ता नहीं रहा है कि नालों तक पोर्कलेन व दूसरी ऐसी मशीनों को पहुंचा जा सके। क्योंकि ये मशीनों तब तक आरटीओ पुलिस सरीखे नालों तक नहीं पहुंच सकेंगी जब तक वहां से अवैध कब्जे ना हटाए जाएं और अवैध कब्जे हटाने के लिए यहां बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जानी जरूरी है और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नगर निगम से बूते के बाहर की बात है। यह काम केवल जिला प्रशासन और पुलिस ही कर सकते हैं। हां इतना जरूर है कि यदि पुलिस प्रशासन के अफसर अवैध कब्जे हटवा दें तो नाला सफाई में फिर नगर निगम को कोई असुविधा या फिर कानून व्यवस्था सरीखी स्थिति का सामाना नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि नाले हर हाल में साफ कराए जाएंगे। इसके लिए भले ही कुछ भी सख्ती ही क्यों ना करनी पड़े। इससे साफ है कि नगर निगम प्रशासन तो नाले साफ कराना तो हर वक्त तैयार है और इसके लिए शहर में तमाम नालों पर काम भी हो रहा है। यह बात अलग है कि कुछ पार्षदों ने जितना काम कराया जा रहा है उसको लेकर नुकताचीनी की है। लेकिन हां यह सही है कि नालों की सफाई का काम चल रहा है और नजर भी आ रहा है। यह बात अलग है कि जितन काम पार्षद चाहते हैं या जिस तरह से चाह रहे हैं संभवत: वैसा शायद नहीं हो पा रहा है। दरअसल 10 जून निकल चुका है और 25 जून से मानसून आने की बात कही जा रही है। इसलिए वक्त भी ज्यादा नहीं बचा है।

यह कहना है निगम अफसरों का

नगरायुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी को नाला सफाई के लिए निर्देशित किया गया है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमर सिंह अवाना ने बताया कि शहर के सभी नालों की सफाई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। नालों की सफाई दिन रात करायी जा रही है। बारिश शुरू होने से पहले नाले नालियों की सफाई करा दी जाएगी। रालोद नेता अब्दुल गफ्फार ने बताया कि नाले नालियों की सफाई का एक ही तरीका है कि नाले की दोनों ओर की पटरियां कब्जा मुक्त कर वहां रास्ते बना दिए जाएं।

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