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डॉलर बना है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद

डॉलर बना है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद

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डॉलर बना है विदेशी निवेशकों की पहली पसंद
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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार और रुपया अब विदेशी निवेशकों को नहीं लुभा रहा है। विदेशी निवेशक अब भारतीय शेयर बाजार, सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं, जिससे भारतीय रुपये (INR) पर दबाव पड़ता है। इसी के चलते भारतीय रुपए की कीमत लगाकर कमजोर और उसके मुकाबले डॉलर की कीमत काफी तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले दिनों में भारतीय रुपए और भी तेजी से लुढ़क सकता है। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के आसार के चलते दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में आज कर्मी आयी है, लेकिन भारत में इसके बाद भी मोदी सरकार ने तेल की कीमतों में इजाफा जारी रखा है। मिडिल ईस्ट तनाव जिसकी वजह से भारत समेत दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ी है, इससे शेयर बाजार पर बुरा असर पड़ा है। इससे वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, जिससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली और सोने की कीमतों में तेजी साफ देखी जा सकती है। मिडिल ईस्ट दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। तनाव बढ़ने या ‘स्टेट ऑफ होर्मुज’ (दुनिया का प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग) प्रभावित होने की आशंका से तेल के दाम तेजी से बढ़ते हैं। विदेशी निवेशकों की यदि बात करें तो वो तेजी से भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर अमेरिका में शिफ्ट करना सुरक्षित समझ रहे हैं। इसके कई फैक्टर हैं। दरअसल जब भी भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट पैदा होता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक भारत और अन्य उभरते बाजारों (Emerging Markets) से अपना पैसा निकाल लेते हैं। असुरक्षा और युद्ध के डर के माहौल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आती है क्योंकि निवेशक इसे सबसे सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven) मानते हैं। बार-बार लड़खड़ाता है बाजार मिडिल ईस्ट तनाव के चलते भारतीय शेयर बाजार बार-बार लड़खड़ाता है। सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी पूंजी की निकासी के चलते कई बार भारतीय बाजारों में 1,000 से 1,600 अंकों तक की बड़ी गिरावटें देखी जा चुकी हैं। ऐसा नहीं कि यह गिरावट आगे दर्ज नहीं होगी। यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं होता है तो इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा और यह भी आशंका है कि सबसे बड़ी गिरावट आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिले।
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