पौड़ी।
प्रकृति पर्यावरण संस्थान एवं उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा संयुक्त रूप से ग्रामीण किसानों के लिए पौड़ी के एकेश्वर ब्लॉक के सतपाली गाँव में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला “गढ़वाल हिमालय की पारंपरिक सतत कृषि प्रणाली: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर आधारित रही।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. अंकित सती ने वर्तमान समय में पारंपरिक कृषि की प्रमुख चुनौतियों को चिह्नित करते हुए मोटे अनाज के महत्व से ग्रामीणों को अवगत कराया। उन्होंने मोटे अनाज के गुणों के साथ-साथ नई तकनीकों के प्रयोग को पारंपरिक खेती के लिए आवश्यक बताया।
कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए प्रकृति पर्यावरण संस्थान के भोपाल चौधरी ने सरकारी योजनाओं के प्रति ग्रामीणों की जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर एनआरएमएस के सचिव डॉ. कपिल पंवार ने कहा कि वर्तमान समय में ग्रामीणों को आपसी सामंजस्य एवं सहयोग से गाँवों को पुनः सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सुदृढ़ कर पलायन पर नियंत्रण के साथ-साथ आजीविका के साधनों को गाँवों में ही विकसित किया जा सकता है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. अंकित उछोली ने योजनाओं में जनसहभागिता को आवश्यक बताते हुए इस प्रकार की कार्यशालाओं के नियमित आयोजन पर बल दिया तथा सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह ‘जय गणपति’ एवं ‘जय बजरंग’ की महिलाएँ भी सम्मिलित हुईं। कार्यशाला में ग्राम प्रधान बबीता नेगी, कविता डोबरियाल सहित सतपाली गाँव के वार्ड सदस्य एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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