मेरठ। दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से मिलने जा रहे कांग्रेस के नेताओं को पुलिस ने सिवाया टोल से लौटा दिया। मौके पर पहुंचे एसपी सिटी ने कांग्रेसी नेताओं कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए आगे जाने देने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। इसको लेकर करीब तीन घंटे तक हंगामे के हालात बने रहे। बाद में कांग्रेस के नेता हंगामा के बाद वापस लौट गए।
यह हुआ
दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से मिलने जा रहे कांग्रेस सांसदों और विधायकों को सोमवार दोपहर 12 बजे पुलिस ने रोक दिया। काशी टोल प्लाजा पर 100 जवान तैनात कर दिए। इससे कांग्रेसी भड़क गए। नारेबाजी करने लगे। पुलिसकर्मियों से उनकी तीखी नोकझोक हो गई। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने डेलीगेशन को टोल प्लाजा के कमरे में बैठा दिया। इस दौरान कांग्रेस डेलीगेशन पीड़ित परिवार से मिलने की जिद पर अड़ा रहा। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले उन्हें कानून-व्यवस्था का हवाला देकर समझाने की कोशिश करते रहे। करीब 2 घंटे बाद कांग्रेसी कमरे से बाहर आए और हंगामा करते हुए 27 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करने का ऐलान किया। इसके बाद डेलीगेशन समर्थकों के साथ दोपहर 2 बजे वापस लौट गया।इससे पहले कांग्रेस कार्यकर्ता सांसद इमरान मसूद के साथ दोपहर 11 बजे दिल्ली से 15-20 गाड़ियों से मेरठ के लिए रवाना हुए थे। इस दौरान कांग्रेसियों ने कहा- एसएसपी साहब से यही गुजारिश है कि हमें पीड़ित परिवार से मिलवाएं। अभी तक इस मामले में क्या एक्शन हुआ, परिवार को कितना मुआवजा मिला। वह इस बारे में बताएं। इसका जवाब मौके पर पहुंचे एसपी सिटी पर नहीं था। उनका कहना था कि यह शासन का मामला है।
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