मेरठ। सुप्रीमकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और सीधे ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी शास्त्रीनगर के 815 परिवारों समेत तमाम लोगों की आस अभी कायम हैं। उनका कहना है कि इस में सप्रीमकोर्ट की दी गयी फांसी की सजा को जब टाला जा सकता है तो फिर यह तो मकानों के ध्वस्तीकरण का मामला है इसको क्यों नहीं टाला जा सकता है। वहीं दूसरी ओर महिलाओं ने आज हाथों में कटोरे लेकर प्रदर्शन किया और उनके निशाने पर सीधे पीएम मोदी थे। वो नारा लगा रही थी कि मोदी तेरे राज में कटोर आ गया हाथ में। महिलाओं ने बताया कि सैटबैक के नाम पर उनके पति और बेटों से कामधंधा छीन लिया गया है। इस पर भी सब्र कर लिया था। काम धंधा छिनने वाले अब आशियाना छीनने पर उतारू हैं। बोले अब सब्र जवाब दे गया है। अब बात बर्दाश्त से बाहर है। अब ठान लिया है कि चुप बैठने से काम नहीं चलगा। जिस हद तक जा सकते हैं जाएगे। अपने आशियानों को यूं उजड़ते नहीं देख सकते। सरकार ने हमारा रोजगार छिना चुप रहे और अब सरकार किसी कोर्ट के आदेश के नाम पर उनको सड़क पर लाना चाहती है तो यह नहीं होगा। यह कतई भी स्वीकार्य नहीं है। सरकार सब कुछ कर सकती है वो चाहे तो रास्ता भी निकाल सकती है। सरकार को हमारे आशियाने बचाने का रास्ता निकलना ही हाेगा। वर्ना सरकार में बैठे लोग फिर खुद को सरकार नहीं कह पाएंगे। अब सब्र का बांध पूरी तरह से टूट चुका है अब सैलाब आ गया है। सरकार को यह याद रखना होता है कि जब लोगों के गुस्से का सैलाब आता तो सरकारें भी नहीं बचती हैं।
बैठक आगे की रणनीति पर चर्चा
सुप्रीमकोर्ट के आदेशों से उत्पन्न हालात पर चर्चा और भविष्य की रणनीति को तय करने के लिए आज बैठक बुलायी गयी। बैठक में बड़ी संख्या मे महिलाएं भी शामिल हुईं। हालांकि बैठक में पहुंचे संघ व भाजपा पृष्ठ भूमि वाले मोदी तेरे राज में कटोरा आ गया हाथ में के नारों से असहज नजर आए। आयोजकों का कहना है कि बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति, कानूनी लड़ाई और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी कदमों पर चर्चा कर निर्णय लिया गया। अब व्यापारियों ने सवाल उठाया गया है कि जब फांसी जैसी सजा तक बदली जा सकती है, तो जनहित में सेटबैक नियमों पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया जा सकता। साथ ही “हमारा अधिकार हमें चाहिए”, “एकता ही हमारी शक्ति”, “सेटबैक नियम पर पुनर्विचार करो” और “हम लड़ेंगे, जीतेंगे” जैसे नारों के जरिए लोगों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। साथ ही यह भी तय किया गया कि धरना जारी रहेगा। इतना ही नहीं आंदोलन और तेज किए जाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान कुछ लोगों ने आशंका जतायी कि हो सकता है कि जो पंद्रह दिन की मोहलत सुप्रीमकोर्ट से मिली है उसके पूरा होते ही प्रशासन की ओर से अचानक कार्रवाई करा दी जाए। जैसा सैंट्रल मार्केट के बाइस दुकानों के कांप्लैक्स के मामले में हुआ। आज की इस बैठक में सबसे अच्छी और महत्वपूर्ण बात यह रही है कि जो अब तक भाजपा और सरकार के खिलाफ चुप रहने की पैरवी करते थे वो पूरी तरह से महिलाओं के इस आंदोलन के साथ नजर आए। हालांकि अभी यह साफ नहीं कि आगे आंदोलन को तेज करने की जो बातें कही जा रही हैं उसमें आंदोलन को तेज करने के लिए क्या-क्या किया जाएगा। क्या पूरे शहर में लोग सड़कों पर उतरेंगे। क्योंकि सुप्रीमकोर्ट का आदेश आने के बाद जिस प्रकार की उम्मीद मेरठ के बाकि लोगों से आवास विकास के नोटिसों के खिलाफ आंदोलन करने वाले कर रहे थे वैसा कुछ अभी तक नहीं हुआ है। आंदोलनकारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। केवल विधायक अतुल प्रधान को अपवाद माना जा सकता है। सुप्रीमकोर्ट का आदेश आने के बाद वह जरूर आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे थे। उन्होंने साथ देने का वादा भी किया है।
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