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कांवड़ यात्रा की तैयारियां परखे जा रहे सुरक्षा इंतजाम

कांवड़ यात्रा की तैयारियां परखे जा रहे सुरक्षा इंतजाम

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कांवड़ यात्रा की तैयारियां परखे जा रहे सुरक्षा इंतजाम
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मेरठ। कांवड़ यात्रा को लेकर लखनऊ के निर्देश पर अफसर तैयारियों में जुट गए हैं। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अफसर संयुक्त रूप से कांवड़ यात्रा की तैयारियां करते हैं। माना जा रहा है कि इस साल हरिद्वार में पांच करोड़ कांवड़ियां पहुंचेंगे। पांच करोड़ी कांवड़ियों के रैले का बड़ा हिस्सा मेरठ के एनएच-58 बाईपास से होकर गुजरेगा। कांवड़ यात्रा के दौरान एनएच-58 का मोदीपुरम, दौराला-सिवाया, कंकरखेड़ा व बागपत बाईपास वाला हिस्सा बेहदसंवेदनशील माना जाता है। हालांकि जहां तक इंतजाम व सुरक्षा व्यवस्थाओं की बात है तो एनएच-58 का पूरा हिस्सा इसमें शुमार किया जाता है। वहीं दूसरी ओर कांवड़ यात्रा मार्ग पर जो सेवा शिविर लगाते हैं उन्होंने भी आवेदन की तैयारी कर ली है। मेरठ की बात करें तो कांवड़ यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में सेवा शिविर लगाए जाते हैं।

होटल की सूची-हाइवे के कट

बाईपास स्थित जितने भी होटल ढावे व खाने पीने का सामान बेचने वाले हैं उन सभी की लिस्ट तैयार की जा रही है। हालांकि इनका पूरा ब्याेरा हर साल तैयार किया जाता है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि प्रशासन व पुलिस के अफसर अपनी जानकारी में केवल इतना भर रखते हैं कि बाईपास या कहें कांवड़ यात्रा मार्ग पर कितने होटल ढावे गैर हिन्दुओं के हैं। वैसे पिछले कुछ समय से देखने में आया है कि गैर हिन्दु होटल ढावे संचालक कांवड़ यात्रा के दौरान स्वत: ही बंद कर लेते हैं या फिर वहां मुस्लिम होटल या ढावा खिलवा दिया जाता है। लेकिन सबसे अच्छी बात यह होती है कि कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्लिम ढावों में भी यात्रा मार्ग पर नॉनवेज नहीं बेचा जाता है। मेरठ में कांवड यात्रा सिवाया टोल प्लाजा के साथ ही प्रवेश कर जाती है। हाइवे की बात करें तो इसमें मार्ग में अनेक स्थानों पर कट हैं। सामान्य दिनों में भी एनएच-58 के इन कट की वजह से अक्सर हादसे होते हैं। लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन व पुलिस के अधिकारी एनएच-58 के तमाम कट बंद करा देते हैं। ऐसा सुरक्षा वजह से किया जाता है। इस बार भी ऐसा ही होने जा रहा है।

ताकि ना हो अनहोनी

कांवड़ यात्रा के दौरान खंभों में करंट दौड़ने से श्रद्धालुओं के साथ अनहोनी की आशंका रहती है। लिहाजा उनकी सुरक्षा को लेकर बिजली विभाग भी अलर्ट हो गया है। जिले भर में तमाम खंभे ऐसे हैं जिन पर करंट आने का खतरा है। लिहाजा विभाग ने इन खंभों पर पन्नी बांधनी शुरू कर दी। जर्जर खंभों को चिह्नित कर उन्हें बदलवाया जा रहा है। जर्जर लाइनों के तार टूटने की जहां संभावना है। ऐसी पचास लाइनों को चिह्नित कर उनके नीचे जाल बंधवाए जा रहे हैं। जिन मार्गों से होकर कांवड़िये गुजरेंगे। उन मार्गो में कई ट्रांसफार्मर बिना बेरीकेडिंग के रखे हुए हैं। जिनसे उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई दी जा रही है। इनके आसपास कोई कांवड़िया न भटके और कोई हादसा न हो। इसके लिए ट्रांसफार्मरों के चारों तरफ बेरीकेडिंग कराई जा रही है। सावन माह शिव भक्तों के लिए पवित्र व महत्वपूर्ण है। हालांकि कांवड़ यात्रा 28 जुलाई से शुरू होगी, लेकिन शिवभक्ताें में अभी से ही जबरदस्त उत्साह है।
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