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मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कैसी ईद

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मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कैसी ईद
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नई दिल्ली। दुनिया भर में भले ही ईद का जश्न हो, लेकिन जिनके पास सिर छिपाने के लिए आशियाना तक नहीं दिन और रात खुले आसमान के नीचे गुजरते हों, जो दो घड़ी सुस्ताने के लिए जगह की तलाश में दर-दर भटकते हों, भला उनके लिए कैसी ईद। गाजा, बेरूत और लेबनान में बारूद बरसा कर बेघर कर दिए गए हजारों लोगों के लिए ईद के कोई मायने नहीं रह गए हैं। सीरियाई शरणार्थी, जो मूल रूप से कब्जे वाले गोलान पहाड़ियों से है, अब बेघर है। उनका पूरा दिन लेबनान की राजधानी में ठिकाने की तलाश में भटकते हुए बीतता है। बेरूत के दहिये में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत इजरायली हमलों में हो चुकी है। ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से गाजा में माल के प्रवेश पर प्रतिबंध बढ़ गए हैं, जिससे कीमतों में और वृद्धि हुई है, हालात बेहद खराब है। सभी लोग अपने घर छोड़कर तंबुओं में और बेघर होकर रह रहे हैं। युद्ध के दौरान सभी ने अपना सब कुछ खो दिया है।”
 शुक्रवार से शुरू हुआ त्योहार ईद-उल-फितर उसके दिमाग से कोसों दूर है। जब उनसे ईद के लिए किसी योजना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने नकारात्मक जवाब दिया। इसके बजाय, उनका ध्यान एक तम्बू खरीदने पर था। एक लड़के ने बताया कि “मुझे स्कूल में दाखिला नहीं मिला, फिर मैं समुद्र तट पर सोने चला गया,” दूसरे ने कहा। “फिर नगर पालिका के लोगों ने मुझे बेरूत के डाउनटाउन में समुद्र तट पर आने के लिए कहा।”
उसको तंबू नहीं मिल पाया और फिलहाल वह खुले में सो रही है। लेकिन इलाके के अन्य लोगों को तंबू मिल गए हैं, जिससे महंगे रेस्तरां और बार के लिए मशहूर शहर का केंद्र लड़ाई से विस्थापित हुए लोगों के लिए तंबू नगरी में बदल गया है। इजरायली हमलों के चलते लेबनाम में दस लाख से ज्यादा लोग उजाड‍़ दिए गए हैं। उनके घर तबाह हो गए हैं। घर के नामों निशान तक मिट गए हैं। घर ही नहीं उनका कुछ भी नहीं बचा है। उन्हें अपने मुस्तकबिल की चिंता है।
उनसे जो भी मिलता है खासतौर से परदेसी नजर आता है उससे एक ही सवाल पूछा जाता है कि लड़ाई कब खत्म होगी। तमाम लेबनानी लोग इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि यह युद्ध कब समाप्त होगा, खासकर इसलिए क्योंकि वे अक्टूबर 2023 से नवंबर 2024 के बीच इजरायल के साथ हुए संघर्ष से मुश्किल से उबर पाए हैं। ऐसे में ईद की बात इनके जहन में भी नहीं आती।
ईरान में, जहां अब अमेरिका और इजरायल के हमलों का तीसरा सप्ताह चल रहा है – और तत्काल अंत के कोई संकेत नहीं हैं तथा संघर्ष से पहले से ही मौजूद आर्थिक संकट के कारण, लोग छुट्टियों के मौसम में आमतौर पर खरीदी जाने वाली किसी भी वस्तु को खरीदने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहां भी इस बार ईद को लेकर कोई खास खुशी नजर नहीं आ रही है। लोगों के दिलों से खुशियां गायब हैं।

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