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मिडिल ईस्ट में बारूदी नहीं बयानी जंग

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मिडिल ईस्ट में बारूदी नहीं बयानी जंग
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नई दिल्ली। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग को बाइस दिन हो चुके हैं, लेकिन कोई भी देश पूर्ण विजय का दावा नहीं कर रहा है। दुश्मन को थका देने वाली जंग चल रही है। हां इतना जरूर है कि अमेरिका, ईरान व इजरायल की अकड़ में जरूर कमी आ गयी है। ईरान में सोना भेजने का दावा करने वाले ट्रंप का कहना है वह फिलहाल जमीनी लड़ाई नहीं शुरू कर रहे हैं, लेकिन विकल्प खुला है। ईरान ने फिलहाल जापानी जहाजों का होर्मूज जलडमरू मार्ग से गुजरने की इजाजत दे दी है। इजरायल ने ईरानी मिसाइलों से हुई नुकसान का रोना रोना शुरू कर दिया है। ईद व नवरोज के मौके पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने शुक्रवार को कहा कि ईरान ने अपने दुश्मनों को “एक करारा झटका” दिया है और उनके देश पर अमेरिका-इजरायल का युद्ध “एक बड़ी गलतफहमी” थी। वहीं दूसरी ओर ट्रंप बार-बार युद्ध विराम से इंकार तो कभी लक्ष्य हासिल करने और आगे लड़ाई की कोई जरूरत नहीं की बात कहते हैं। दरअसल वो नॉटो व यूरोपीयन यूनियन के देशों से नाराज नजर आते हैं।
इन दिनों भारत के पड़ौसी देश चीन में ईरान के प्रति जबरदस्त हमदर्दी का माहौल बना हुआ है। चीन में एक तरह से ईरान प्रेम की बयार चल रही है। इसके पीछे क्या कारण है ऐसा क्या है इसका जवाब किसी को नहीं पता, लेकिन आम चीनी ईरान के प्रति हमदर्दी जाहिर कर रहे हैं। उनकी नाराजगी अमेरिका और इजरायल के प्रति साफ नजर आती है।
मिडिल ईस्ट के चुनाव की वजह से पूरी दुनिया में महंगाई की आग लगी है। इसमें भारत भी शमिल है। एलपीजी गैस की भारत समेत तमाम देशों में परेशानी हो गई है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान ने अपने दुश्मनों को “एक करारा झटका” दिया है और उनके देश पर अमेरिका-इजरायल का युद्ध “एक बड़ी गलतफहमी” थी। उन्होंने ईरानियों की हिम्मत की भी दाद दी। साथ ही कहा कि पूरी दुनिया के हालात के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपने किसी भी मुसलमान पड़ौसी से लड़ाई नहीं चाहता ना ही हमले करना चाहता है, लेकिन हालात उसको हमला करने के लिए मजबूर करते हैं।
जंग के दौरान ईरान में 1,400 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि लेबनान में इजरायली बमबारी में 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इजरायल में ईरानी मिसाइलों से कम से कम 18 लोग मारे गए हैं, जबकि अब तक कम से कम 13 अमेरिकी सैनिक शहीद हो चुके हैं।

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