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सुहेलदेव को फिर से याद कराते योगी: “एक हजार साल बाद उनका स्मारक बनवाने का गौरव मिला”

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सीएम योगी का युवाओं को बड़ा गिफ्ट
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में कहा कि हमारे समाज ने राजा‑शूरवीर महाराजा सुहेलदेव को लंबे समय तक भूल दिया था, मगर अब उन्हें फिर से इतिहास के पन्नों पर जगह मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से एक हजार साल बाद उत्तर प्रदेश सरकार को यह गौरव प्राप्त हुआ कि वह बहराइच में उसी जमीन पर महाराजा सुहेलदेव का स्मारक बना सके, जहां उन्होंने सैयद सालार मसूद गाजी को शिकस्त दी और युद्ध में उसका वध किया था।

सुहेलदेव और सालार मसूद की “एकतरफा धड़ाम”

सीएम योगी ने कहा कि सालार मसूद कोई उपदेशक नहीं, बल्कि भारत को लूटने और इस्लाम फैलाने आए आक्रांता था, जो “आज के किसी माफिया से कम नहीं” था। उन्होंने दावा किया कि सोमनाथ मंदिर को तोड़ने से लेकर अयोध्या में राम‑मंदिर को क्षतिग्रस्त करने तक की जिम्मेदारी भी उसके कदमों पर बताई जाती है। उन्होंने सुहेलदेव की बात करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए उनका योगदान गौरवमय रहा, लेकिन दीर्घकाल तक उन्हें इतिहास के अंधेरों में छोड़ दिया गया।

योगी ने कहा कि वहां पर मौलवियों का मेला लगता था, सुहेलदेव का नहीं—लेकिन अब बदलाव की हवा चल पड़ी है और भीड़ उलटा सुहेलदेव‑सम्मान के मेलों और कार्यक्रमों की ओर मुड़ रही है। उन्होंने शिक्षा संस्थानों से अपील की कि रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा सुहेलदेव और इसी तरह के अन्य राष्ट्र‑नायकों के किस्सों को स्कूल–कॉलेजों में नाटक‑शृंखला के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास करें, ताकि युवा पीढ़ी अपने शौर्य की कहानियों से परिचित हो सके।

सालार गाजी की “शर्मनाक” मौत का दृश्य

सीएम ने इतिहास की कथा बताते हुए यह भी बताया कि सुहेलदेव ने सालार मसूद को उस मौत दिलाई, जिसे इस्लाम में खराबतम माना जाता है—उनके शरीर को गर्म लोहे के तवे या घेरे में जलाकर मारा गया, जिसे बाद के ग्रंथों में इस्लामी परंपरा में “जहन्नुमी मौत” की तरह बताया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक अत्याचारी शक्तियों के साथ ऐसी ही कठोर भावना से नहीं लड़ा जाएगा, तब तक भारत की संस्कृति के साथ ऐसा ही आक्रमण बना रहेगा।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने भारतेंदु अकादमी के 15 पूर्व विद्यार्थियों और रंगकर्मियों को भी सम्मानित किया। उनका कहना था कि रंगमंच और राजनीति दोनों के लिए इतिहास बहुत बड़ा शिक्षक है, इसलिए अतीत के उन घटना–पटों को फिर से सामने लाना जरूरी है, जहां भारत ने अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए अपने शूरवीरों पर भरोसा किया।

स्मारक‑नाटक–राष्ट्र‑स्मृतिः एक नई रणनीति

सीएम योगी ने यह भी बताया कि सुहेलदेव के नाम पर मेडिकल कॉलेज जैसी संस्थाएं और उनकी विशाल कांस्य प्रतिमा भी बहराइच में बन चुकी हैं, जो उन शौर्य की यादें जीवित रखती हैं। उनका तर्क है कि इतिहास को नट‑गायन‑नाटकों के साथ भी समाज के बीच ले जाने पर, न केवल राष्ट्र‑आत्मभान बढ़ेगा, बल्कि अतीत के अध्यायों के विरोधाभास और संघर्षों पर भी नए‑नए कोण सामने आएंगे।

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