मेरठ। सदर स्थित सनातन धर्म इंटर कालेज में टीचरों की भर्ती पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने रोक लगा दी है। आरोप है कि नियम कायदों को ताक पर रखकर विद्यालय प्रबंध तंत्र शिक्षकों की भर्ती करने जा रहा था। इतना ही नहीं यह भी आरोप है कि जो टीचर पहले से वहां पर पढ़ा रहे हैं सेटिगेटिंग कर उन्हें ही भर्ती किए जाने की तैयारी थी। इस मामले की शिकायत सनातन धर्म के पूर्व टीचर मनोज सिंधु ने आरआईजीएस पोर्टल पर शिकायत की थी। शासन के निर्देश पर जिसकी जांच जिला विद्यालय निरीक्षक ने की। जांच के बाद एसडी सदर में टीचरों की भर्ती पर रोक लगा दी गयी। इस संबंध में डीआईओएस ने कृत कार्रवाई से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है।
यह है पूरा मामला
बकौल एसडी सदर के पूर्व टीचर मनोज सिंधु एसडी सदर में कायदे कानून ताक पर रखकर टीचरों को रखा गया है। इन टीचरों की सेलरी के लिए स्कूल के बच्चों को डरा धमका कर करोड़ों की उगाही की जा रही है। भविष्य का भय दिखाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता है। मनोज सिंधु की मानें तो जो करोड़ों की रकम उगाही जाती है, उसी रकम से जो प्राइवेट टीचर रखे गए हैं उनकी सेलरी दी जा रही है। वहां करीब चालिस टीचर ऐसे रखे गए हैं, जबकि नियमानुसार केवल दो टीचर कामर्स पढ़ाने के लिए रखे जा सकते हैं। इन टीचरों को ही भर्ती किए जाने की तैयारी विद्यालय प्रबंध तंत्र कर रहा था। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में जो नियम कायदे हैं उनकी पूरी तरह से अनदेखी की गई है। इस बात की पुष्टि डीआईओएस जगदीश प्रसाद शुक्ल द्वारा 2 जुलाई को जिलाधिकारी को प्रेषित पत्र में भी की गयी है।
एसडी सदर में टीचरों की भर्तीै प्रक्रिया पर रोक से डीएम को भेजे गए पत्र में डीआईओएस ने अवगत कराया है कि मनोज कुमार सिंधु के द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज करायी शिकायत संख्या 40013828028629 के द्वारा सनातन धर्म इण्टर कालेज सदर के विद्यालय प्रबन्धन द्वारा शिक्षा माफिया अधिकारी गठजोड के तहत दलित एवं शोषित वर्ग के अति निर्धन छात्रों से करोड़ो रुपये प्रतिवर्ष की जबरन और शल्य वसूली/ लूट खसोट संगठित वैधानिक टकती कर परस्पर बंदरबाट अनुचित आर्थिक व अवैध लाम प्रदान करने संबंधित गैरकानूनी, गैर जमानती सुनियोजित संगठित आर्थिक अपराध का संस्थागतकरण हेतु शासन प्रशासन को गुमराह करने लिए जालसाजी /धोखाधडी के सम्बन्ध में शिकायत की गयी है।
प्रकरण की जाँच हेतु प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज बहरामपुर जानी , वित्त एवं लेखाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) मेरठ एवं प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज कायस्थ बढता को संयुक्त जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया। मनोज कुमार ने नारायण शरण को हटाये को कहा था, जिस कारण जाँच प्रधानाचार्य जीआईसी बहरामपुर जानी एवं वित्त एवं लेखाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) को सौंपी गयी। जांच रिपोर्ट आने के बाद एसडी सदर प्रधानाचार्य को कृत कार्रवाई को लेकर पत्र प्रेषित किया गया। भर्ती प्रक्रिया के लिए विद्यालय प्रबन्धन द्वारा वित्त विहीन शिक्षकों की नियुक्ति हेतु दैनिक आज समाचार पत्र में विज्ञप्ति प्रकाशित करायी गयी है, लेकिन प्रकाशित करायी गयी विज्ञप्ति में पदनाम रिक्त पदों की संख्या शैक्षिक अर्हता एवं वेतन आदि का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही शासनदेश में वर्णित है कि कम से कम दो समाचार पत्रों में जिनका प्रदेश तथा उस क्षेत्र विशेष में जिसमें विद्यालय अवस्थित हो, व्यापक प्रचलन हो, में विज्ञापित किया जायेगा। जबकि विद्यालय प्रबन्धन द्वारा केवल एक स्थानीय समाचार पत्र में ही अपूर्ण विज्ञप्ति प्रकाशित करायी गयी है।
ना लिया जाए कोई शिक्षण कार्य
एसडी सदर के प्रधानाचार्य को भेजे गए जिला विद्यालय निरीक्ष के पत्र में निर्देशित किया गया है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 मे अस्थायी शिक्षकों / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से विद्यालय में किसी भी प्रकार कोई कार्य नहीं लिया जाये। शैक्षिक सत्र 2026-27 में अंशकालिक शिक्षकों के चयन की कार्यवाही शासनादेश संख्या-1443/15-07-2001-01 (191)/2000 दिनांक 10.08.2001 में वर्णित प्राविधानों के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किये जाने हेतु प्रबन्धक / प्रधानाचार्य सनातन धर्म इण्टर कालेज सदर मेरठ को पत्र प्रेषित करते हुए, निर्देश दिये गये। लेकिन मनोज सिंधु का आरोप है कि डीआईओएस के पत्र में मनाही के बावजूद उक्त अस्थायी शिक्षकों / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से प्रधानाचार्य कार्य ले रहे हैं। इस मामले में जब एसडी सदर के प्रधानाचार्य से संपर्क का प्रयास किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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