Home मेरठ बारिश से गर्मी से राहत जलभराव में फंसे लोगों का निकला पसीना
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बारिश से गर्मी से राहत जलभराव में फंसे लोगों का निकला पसीना

बारिश से गर्मी से राहत जलभराव में फंसे लोगों का निकला पसीना

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बारिश से गर्मी से राहत जलभराव में फंसे लोगों का निकला पसीना
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मेरठ। चंद मिनटों की बूंदाबांदी से रेलवे रोड का रौनकपुरा व महानगर के कई दूसरे इलाके पानी-पानी हो गए। हालांकि अच्छी बात यह रही है कि नगर निगम की दुरूस्त सफाई व्यवस्था के चलते जिन दूसरे इलाकों में पानी भरा वहां जैसे पानी भरा वैसे निकल भी गया, लेकिन रेलवे रोड रौनकपुरा में स्थित ज्यादा खराब है। यहां पानी भरने की वजह नाले नालियों की सफाई ना कराया जाना। लोगों का कहना है कि नियमित रूप से यदि सफाई कर्मचारी आए तो समस्या का समाधान हो जाए। आज दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश का असर कई इलाकों में देखने को मिला। बारिश ने गर्मी से तो राहत दिलायी लेकिन पानी भर जाने की वजह से फंस गए लोगों का पसीना निकाल दिया। सबसे बुरा हाल शहर की घनी आबादी वाले इलाकों में हुआ। ऐसे इलाकों में लिसाड़ी रोड से सटे गली मोहल्ले अधिक रहे। इसके अलावा मलियाना इलाके में भी बारिश का पानी भर जाने से लोग परेशान रहे।

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रेलवे रोड रौनकपुरा वार्ड 42 में रहने वाले उलाहना देते हैं कि यहां महापौर यानि हरिकांत अहलुवालिया भी भाजपाई हैं और वार्ड के पार्षद रोहित जैन भी खुद खांटी भाजपाई हैं, इसके बाद भी यहां विकास के लिए लोग तरस रहे हैं। समस्याएं यदि गिनानें बैठें तो अखवार का पूरा पेज भर जाएगा लेकिन लोगों की समस्याएं फिर भी पूरी तरह से लिखी नहीं जा सकेंगी। लोगों का यह भी कहना है कि जब भाजपाई महापौर और खुद भाजपाई होते हुए पार्षद कार्य नहीं करा पा रहे हैं तो फिर यदि विपक्ष का महापौर होता तो क्या ही काम कराते। सबसे ज्यादा मुसीबत तो बारिश के मौसम में उठानी पड़ती है। मामूली बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं। घर के नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। बिजली के तार मकानों से सटकर गुजरे हैं, जिससे करंट का खतरा बना रहता है। यहां शिकायतें अपार हैं और समस्याओं का अंबार है तथा समाधान की दरकार है। सफाईकर्मी नियमित नहीं आते। नालों से निकला कूड़ा सड़कों पर ही छोड़ दिया जाता है। स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। नाले कचरे से पटे पड़े हैं। जगह-जगह सड़कें टूटी हैं और उनमें बड़े-बड़े गड्‌ढे हो गए हैं। नालियां लंबे समय से साफ नहीं की गई हैं। इन पर झाड़ियां उग आई हैं। गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं। इतना ही नहीं कूडे कचरे के ढेर पर कई बार मरे हुए पशुओं को फैंक दिया जाता है। एक तो गर्मी का मौसम उस पर मरे हुए पशुओं का फैंक दिया जाना। दुर्गंध की वजह से सांस लेना भी मुश्किल होता है। रही सही कसर चौक नाले नालियों की वजह से उनमें सड़ने वाला कूडा कचरे से उठाने वाली सड़ांध पूरी कर देती है। यहां स्ट्रीट लाइट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और सफाई के बाद निकाला गया कूड़ा भी सड़क पर छोड़ दिया जाता है। गंदगी के कारण मच्छर और बीमारियां लगातार बढ़ रही हैंसाफ पानी नहीं मिल रहा और सार्वजनिक शौचालय की भी कमी है।बकरीद के बाद एक महीने से अधिक समय तक नालियों की केवल खानापूर्ति वाली सफाई की गई। शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वहीं दूसरी ओर इस इलाके के पार्षद रोहित जैन समस्याओं की बात मानते हैं, वो बताते हैं कि काम कराया जा रहा है। शीघ्र ही सभी समस्याओं का समाधान करा दिया जाएगा। काफी कार्य कराए भी गए हैं। नगरायुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि जो भी कार्य पार्षद बताते हैं वो सभी कराए जा रहे हैं। महानगर की सफाई व्यवस्था में काफी सुधार है। बारिश में अब कहीं पानी नहीं भरता है। यदि भरता भी है तो पानी तुरंत निकल भी जाता है।

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