Home मेरठ संघ के शताब्दी वर्ष पर महानगर में चार स्थानों पर गोष्ठी
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संघ के शताब्दी वर्ष पर महानगर में चार स्थानों पर गोष्ठी

संघ के शताब्दी वर्ष पर महानगर में चार स्थानों पर गोष्ठी

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संघ के शताब्दी वर्ष पर महानगर में चार स्थानों पर गोष्ठी
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार भी जन्मजात देशभक्त थे

मेरठ/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन कर रहा है, इसी क्रम में आज महानगर में भी 4 स्थानों पर गोष्ठी का आयोजन हुआ है।
दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज माल रोड, कैंट पर संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर बोलते हुए मेरठ प्रांत के सह संपर्क प्रमुख वेदपाल ने कहा कि सभी के मन में यह प्रश्न आता है कि संघ की स्थापना क्यों हुई।
उन्होंने कहा कि भारत देश बहुत प्राचीन देश है, हमारा देश कभी भी गुलामी की मानसिकता का नहीं रहा। भारत कभी भी गुलाम नहीं हुआ परंतु 1000 वर्ष संघर्ष जरुर रहा, ऐसा कभी नहीं हुआ कि पूरा भारत एक साथ गुलाम हो गया हो। भारत मैं अनेकों महापुरुषों ने संघर्ष किया,महाराणा प्रताप छत्रपति शिवाजी, गुरु नानक देव, गुरु गोविंद सिंह,रानी लक्ष्मीबाई सभी ने अपने प्राणों की आहुति देकर इस पूरे भारत को कभी भी गुलाम नहीं होने दिया,अनेकों महापुरुष ऐसे हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की रक्षा के लिए और देश की सेवा में लगा दिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार भी जन्मजात देशभक्त थे, उनके जीवन की अनेकों ऐसी घटनाएं हैं जो यह बताती हैं कि वह जन्मजात देशभक्त थे।
अंग्रेजी शासन में जब पूरे देश में वंदे मातरम कहना अपराध था,ऐसे में उन्होंने पूरे स्कूल को संगठित कर अंग्रेज अधिकारी के आगमन पर पूरे स्कूल की सभी क्लासों में एक साथ वंदे मातरम का उद्घोष करवा दिया, उसके पश्चात उनको स्कूल से निकाल दिया गया, वह पढ़ाई करने के लिए कलकत्ता चले गए, क्योंकि उस समय कलकत्ता क्रांतिकारियों का केंद्र था,वहां पर वह क्रांतिकारियों के संपर्क में आ गये, और देश को आजाद करने के लिए उनके साथ कार्य करने लगे।
लेकिन उनका चिंतन यह था कि इतना प्राचीन भारत आखिर गुलाम क्यों हुआ उन्होंने देखा कि भारत के लोग मिलकर काम नहीं करते, उनमें एकता नहीं है, इतना विशाल हिंदू समाज अपना गौरव को भूल गया है, समाज का मनोबल गिर चुका है समाज यह मान चुका कि अब हम कभी भी आजाद नहीं हो सकते,स्वतंत्र नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने निर्णय लिया और विजयदशमी के दिन 1925 में अपने साथ 17 साथियो $को लेकर संघ की स्थापना की। उन्होंने बहुत सावधानी से संघ को आगे बढ़ाया इसीलिए उन्होंने किसी व्यक्ति को गुरु ना बनाकर परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु बनाया। आज पूरे विश्व का सबसे बड़ा संगठन अपनी सभी आवश्यकता अपने स्वयंसेवक के माध्यम से ही पूरे वर्ष में एक बार भगवा ध्वज के सामने अपना समर्पण करके यह आवश्यकता पूरी करता है। 1940 में जब डॉक्टर हेडगेवार का देहांत हुआ, उस समय पूरे देश में 1000 शाखाएं हो गई थी। उनके बाद संघ की कमान माधव सदाशिवराव गोलवरकर ने संभाली, उन्होंने पूरे देश का अनेकों बार भ्रमण कर संघ कार्य को आगे बढ़ाया, उनको जहां पर जैसी आवश्यकता लगी, वैसा संगठन बना दिया,100 वर्ष पहले प्रारम्भ किया वह संगठन आज पूरे विश्व का सबसे बड़ा संगठन है, लेकिन आज भी अनेकों चुनौतियां देश के सामने हैं, संघ ने तय किया की पांच परिवर्तन के माध्यम से हम अपना शताब्दी वर्ष मनाएंगे,पंच परिवर्तन का पहला माध्यम है सामाजिक समरसता : संघ यह आग्रह करता है की देवालय,जलाशय, और शमशान यह सभी के लिए होने चाहिए, दूसरा माध्यम है पर्यावरण: पूरे समाज से यह आग्रह है कि वह पेड़,पानी और पन्नी के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा करें, तीसरा माध्यम है कुटुंब प्रबोधन, चौथा है परिवार प्रबोधन: परिवार प्रबोधन के लिए भाषा, भूषा,भोजन, भवन, भ्रमण और भजन यह 6 विषय पर हमें ध्यान रखना चाहिए पांचवा है स्व का बोध
माधव कुंज पर बोलते हुए मेरठ प्रांत के प्रचार प्रमुख सुरेंद्र जी ने हिंदुत्व जीवन शैली के विषय को रखा। बागपत बायपास रोड मेरठ स्थित एमआईईटी इंजीनियरिंग कालेज कैंपस में प्रमुख जन गोष्ठी का संचालन राजीव जी द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में दीप प्रज्वलन के उपरांत मुख्य अतिथि विनीत कौशल विभाग प्रचारक मेरठ विभाग ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा एवं डॉ.हेडगेवार के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि 12 करोड़ हिंदू परिवारों से ग्रह संपर्क अभियान द्वारा संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि 85 हजार हिंदू सम्मेलन पूरे देशभर में हुए। उन्होंने बताया कि शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण द्वारा राष्ट्र निर्माण किस प्रकार कर सकते है।
वह अनुशीलन समिति की सदस्य रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने 14 महीने शक्त करावास झेला। पूरी दुनिया को हमने ज्ञान देने का कार्य किया। सत्र के अंत में विनीत जी ने पंच परिवर्तन में विस्तृत प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में मेरठ विभाग संघचालक जतन स्वरूप के द्वारा गोष्ठी में हिंदुत्व दर्शन द्वारा बताया कि हमारी संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति है। उपस्थित प्रमुख जनों के प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासा का समाधान किया। कार्यक्रम स्थल पर संघ की 100 वर्ष की यात्रा को चित्रों के माध्यम से दर्शाने वाली प्रदर्शनी लगाई गई। प्यारेलाल शर्मा स्मारक में हुई प्रमुख जन गोष्ठी में प्रांत सह सद्भाव प्रमुख अरुण जिंदल ने हिंदू धर्म की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अपनी परंपराओं और आस्था के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें मानसिक गुलामी से बाहर निकलकर स्व-बोध करना होगा तथा आगामी वर्षों में समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए।

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