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राम के नाम पर धरना उठा गए सांसद

धरना स्थल पर पहुंचे अरुण गोविल बोले रखें भरोसा

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धरना स्थल पर पहुंचे अरुण गोविल बोले रखें भरोसा
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मेरठ। सांसद अरुण गोविल धरना स्थल पर पहुंचे। उनके आने से पहले ही माहौल बनाने का काम भाजपाइ कर चुके थे। रही सही जो कसर बाकि रह गयी थी वो सांसद अरुण गोविल के पहुंचने के बाद पूरी हो गयी। जय श्रीराम भारत माता की जय और उसके बाद सांसद की ओर से आश्वासन यही कि सरकार आपके साथ है। भाजपा के आपके साथ है अब धरना खत्म कर दीजिए। सांसद ने आग्रह किया तो महिलाओं ने देरी नहीं की और कह दिया कि धरना समाप्त किया जाता है, लेकिन यह भी कह दिया कि यदि कुछ नहीं हुआ तो धरना दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। धरना जिस तरह से खत्म किया गया। उससे लोग इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि सांसद पहले भी आए थे जब कुछ हासिल हो सकता था तब एन मौके पर धरना खत्म करा दिया। लड्डू बंटवा दिए और आतिशबाजी करा दी। उसके बाद हुआ। दोबारा धरना शुरू करना पड़ गया क्या इस बार भी ऐसा ही होगा। इससे पहले सांसद पहुंच  उन्होंने व्यापारियों व महिलाओं से बातचीत भी की, लेकिन जो कुछ भरेासा सांसद से महिलाएं चाती थीं वो नहीं मिला हालांकि सांसद ने बताया कि अफसरों व सरकार से बात करेंगे। उन्होंने भरोसा रखने बनाए रखने को कहा। इससे पहले आज आवास विकास परिषद ने सुबह से ही सेटबैक की जद में आने वाले मकानों पर नोटिस चस्पा करने शुरू कर दिए। सांसद अरुण गोविल के आने की खबर पहले से ही मिल गयी थी। लेकिन नोटिस की कार्रवाई से महिलाए बुरी तरह उखड़ गईं। उन्होंने कहा कि सेटबैक के नोटिस आवास विकास के अधिकारी केवल खुद की नौकरी बचाने के लिए चस्पा करा रहे हैं। जो लोग नोटिस चस्प करने पहुंचे थे महलाओं ने उनसे कहा कि ऐसे नोटिस पहले उन अफसरों के मकानों पर चस्पा करो जिन्होंने ये मकान बनवाए। पैसे खाते रहे और आखिर तक बोले नहीं। यदि हमारा मकान नहीं बचा तो अफसरों के मकान भी नहीं बचेगे। महिलाओं ने कहा कि जो मकान खुद आवास विकास परिषद ने बेचे उनमें कहीं भी सेटबैक नहीं है। फिर अफसर किस बूते बाकि आवंटियों से सेटबैक छोड़े जाने की बात कर रहे हैं।

सांसद अरुण गाेविल महिलाओं के बीच पहुंचे। महिलाओं ने नाराजगी जतायी यह नाराजगी सांसद के देरी से आने को लेकर थी। साथ ही उलाहना दिया कि जिस राम के भरोसे यहां बैठे हैं उन्हें ही सुध लेने की फुर्सत नहीं है। सांसद ने महिलाओं की बातें संयम से सुनी और कहा कि भरोसा रखें। सरकार गंभीर है। कोई ना कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन महिलाएं चाहती थीं कि सांसद कुछ ऐसा कहें ताकि उनका भरोसा बना रहे और धरना थी खत्म कर दिया जाए। सांसद धरना तो खत्म करने की बात कर रहे थे लेकिन देने को कोई ठोस आश्वासन उनके पास भी नहीं था। आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है जब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता वो यहां से कैसे उठ सकते हैं। जब तक धरनपा है तब तक उनकी बात भी सुनी जा रही है अफसर और नेता भी आ रहे हैं, लेकिन धरना खत्म होने के बाद कोई उनसे मिलेगा भी नहीं।

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