नई दिल्ली। इस साल जनवरी माह के बाद एक बार फिर नेता जी सुषाष चंद बोस को राष्ट्रपुत्र वाली जनहित याचिका को लेकर कोर्ट ने फटकार लगायी है। इसको केवल सस्ती लोकप्रियता हासिकल करने का तरीका करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “राष्ट्रपुत्र” घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को 20 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। नेता जी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्र पुत्र घोषित करने वाली जनहित याचिका को सुप्रीमकोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही फटकार भी लगायी है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस प्रकार की याचिकाएं अदालात में ना लायी जाएं।
कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि नेताजी जैसे नेता “अमर” हैं और उनकी महानता को मान्यता देने के लिए किसी न्यायिक आदेश या उपाधि की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को बार-बार ऐसी याचिकाएं दायर करने पर “अincorrigible” (सुधरने योग्य नहीं) कहा और चेतावनी दी कि उनकी सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बैन कर दी जाएगी।
सस्ती लोकप्रियता और कुछ नहीं
इस प्रकार की हरकतें वो ही करते हैं जो सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं लेकिन सह स्वीकार्य नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका लोकप्रियता हासिल करने के लिए दायर की गई थी और ऐसे मुद्दे न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा इसी तरह के मुद्दों पर दायर की गई किसी भी अन्य जनहित याचिका को स्वीकार न करे।
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