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अब धरना खत्म करने को लेकर हाे रही रार

अब धरना खत्म करने को लेकर हाे रही रार

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अब धरना खत्म करने को लेकर हाे रही रार
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मेरठ। सेटबैक को लेकर चौदह दिन चले धरना अचानक सांसद के कहने पर खत्म कर देने पर रार हो रही है। कुछ व्यापारियों का आरोप है कि भाजपा नेताओं के इशारे पर पहले से प्लानिंग कर धरना खत्म तेा करा दिया हासिल क्या हुआ है। सेटबैक की मुसीबत तो जस की तस है। उससे कहा मुक्ति मिली हे। जिन्होंने धरना उठवाया अब वो सांसद की समस्या का समाधान भी कराएं। शास्त्रीनगर सेक्टर दो के व्यापारियों को सांसद का भरोसा राम यानि भगवान के भरोसे हैं। सासंद के करीबियों की मानें तो सांसद को ताे समस्या क्या है ये तक नहीं पता फिर वो मदद क्या करें। पूर्व में जब पीएम मेादी और सीएम योगी को रैपिड के लोकार्पण के लिए आना था और आने से ऐन पहले शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में शटर डाउन कर दिए गए तब भी सांसद को पूरे मसले की जानकारी न होने की बात करीबी बताते हैं। यहंा तक कहा जात रहा है कि सांसद का केवल चेहरा यूज किया जा रहा है। भाजपा की लोकल पालटिक्स में सांसद इंटरेस्ट नहीं लेते। और भाजपा की लोकल पॉलटिक्स के चलते दो बार पहली बार जब पीएम व सीएम को मेरठ आना था तब और अब दो दिन पहले यानि बीते शुक्रवार को सांसद के फेस का यूज किया गया। इस यूज के पीछे सेंट्रल मार्केट और सेक्टर दो आवास विकास की योजना संख्या सात के 850 के व्यापारियों की समस्या की जहां तक बात है उसका तो सांसद का इलम तक नहीं। जब किसी बात की जानकारी ही नहीं है तो फिर मदद क्या की जाए। सांसद को बताया गया कि व्यापारी धरने पर हैं। और इससे पार्टी और सरकार की बदनामी हो रही है। महिलाएं चौदह दिन से धरने पर बैठी हैं।

जेला लेवा गरर्मी पड़ रही है महिलाएं धूम और गर्मी में ब्याकुल हैं। उनके साथ छोटे-दोटे बच्चे भी मौजूद हैं। किसी को कुछ हो गया तो मुसीबत हो जाएगी। वैसे भी साल 2027 के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। इसलिए जरूरी है कि महिलाओं का धरना किसी भी प्रकार कुछ भी कह सुनकर खत्म करा दिया जाए। इतनी सी बात समझा दी गयी और फिर वही हुआ जो सब चाहते तो थे लेकिन हो नहीं पा रहा था। सांसद पहुंचे तो धरना खत्म करा दिया गया। इसके पीछे सांसद के फेस की वेल्यू भाजपाई भी मान रहे हैं। लेकिन इस सब के बीच व्यापारियों की समस्याएं जहां की तहां बाकि बनी हुई हैं।जो धरना दे रहे थे उनका भी कहना है कि धरना खत्म कराया है समस्याएं तो अभी बाकि हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो कह रहे हैं कि धरना खत्म करने में इस बार भी सेंट्रल मार्केट की तर्ज पर जल्दबाजी दिखाई गयी। जिस वजह से धरना चौदह दिन तक चलाया उस मुद्दे पर तो तफसील से बात की होती। धरना समाप्त करने के सवाल पर भी अब दो फाड हाे गएस हैं।

बात सिर्फ महिलाओं से

संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता भी इस बात का मानते हैं कि सांसद तक असली बात नहीं पहुंची। नवीन गुप्ता पांच मिनट अलग सांसद से मिलना चाहते थे लेकिन सांसद ने कह दिया कि वह केवल महिलाओं से मिलने आए हैं किसी अन्य से कोई बात नहीं कहेंगे। भाई जब आप बात नहीं करोगे तो दूसरे को क्या जरूर है कि आपके पीछे भागेगा। बकौल नवीन गुप्ता सांसद अरुण गोविल व्यापारियों की समस्या जानने के लिए यहां पहुंचे थे। वह व्यापारियों के बीच जरूर पहुंचे, लेकिन व्यापारियों से ही उनकी बात नहीं हो पाई क्योंकि उनके साथ कुछ ऐसे लोग मौजूद थे जिन्होंने उन्हें वहां व्यापारियों से बात नहीं करने दी। हम व्यापारियों की लड़ाई लड़ते हैं संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारी हैं, इसीलिए हम यह चाहते थे कि उन्हें व्यापारियों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा नहीं होने दिया।

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