Home Up मेरठ की शान लौटी, नौचंदी मेले का धूमधाम से हुआ शुभारंभ – मौत का कुआं, सर्कस और मछली टनल ने बढ़ाया रोमांच
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मेरठ की शान लौटी, नौचंदी मेले का धूमधाम से हुआ शुभारंभ – मौत का कुआं, सर्कस और मछली टनल ने बढ़ाया रोमांच

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मेरठ का ऐतिहासिक नौचंदी मेला इस बार मौसम की मार झेल रहा है। अगर आप इस विरासत से जुड़े मेले का हिस्सा बनने का सोच रहे हैं, तो जून के पहले सप्ताह में ही आने की योजना बनाएं। फिलहाल क्षेत्र में लगातार आंधी और बारिश के कारण झूले और दुकानें पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई हैं। मेले की रंगत को संवरने में अभी कुछ दिन और लगेंगे।

शुभारंभ में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक झलक

नौचंदी मेले की औपचारिक शुरुआत 26 मई 2025 को माता की चौकी के साथ हुई। यह शुरुआत मेरठ के लिए विशेष रही, जब उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं मेरठ प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने मां चंडी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर और दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। मंत्री ने घोषणा की कि यह मेला एक महीने तक भव्यता से आयोजित किया जाएगा।

सांस्कृतिक रंग Patel Mandap से हर शाम

मेले के नोडल अधिकारी सौरव गंगवार, जो मेरठ नगर निगम के नगरायुक्त भी हैं, ने बताया कि इस बार मेला न केवल मनोरंजन का केंद्र बनेगा, बल्कि संस्कृति और परंपरा की विविधता का मंच भी बनेगा। पटेल मंडप में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं — जिसमें लोकगीत, नृत्य, नाटक और धार्मिक प्रस्तुतियां शामिल हैं।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम

  • पूरे मेला क्षेत्र में आधुनिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
  • सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष टीमों की तैनाती की गई है।
  • हर कोने पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए टीम सक्रिय है।

मनोरंजन और स्वाद का संगम

नौचंदी मेला हमेशा से ही अपने मनोरंजक झूलों और रोमांचक खेलों के लिए प्रसिद्ध रहा है। इस बार भी—

  • मौत का कुआं,
  • सर्कस,
  • मछली टनल,
  • और बच्चों के लिए आकर्षक झूले लगाए जा रहे हैं।

खाने के शौकीनों के लिए भी भरपूर इंतज़ाम हैं—

  • हलवा-पराठा,
  • देसी व्यंजन,
  • और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड की भरमार। कब आएं?

हालांकि मेले का उद्घाटन 23 मार्च 2025 को पारंपरिक रूप से होली के बाद दूसरे रविवार को कर दिया गया था, लेकिन असली रौनक और पूरी सजावट के साथ मेला 26 मई से शुरू हुआ है। मौसम की वजह से झूले और दुकानें लगाने में 2–4 दिन और लग सकते हैं, इसलिए सैर की योजना जून के पहले सप्ताह के लिए बनाएं।

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