मेरठ। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश पंजी ने बिजली के बिलों पर दस फीसदी अधिभार लगाए जाने के विरोध में पीवीवीएनएल एमडी को ज्ञापन देकर बढ़ाई गईं दरें वापस लिए जाने की मांग की है। व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल के नेतृत्व में एमडीए पीवीवीएनएल रवीश गुप्ता से मिले प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि इससे जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पहले ही महंगाई की मार से जनता त्रस्त है। ऐसे में बिजली के बिलों पर दस फीसदी अधिभार का बढ़ाया जाना तर्क और न्याय संगत नहीं।
ये हैं मांगें
एमडी पीवीवीएनएल को लोकेश अग्रवाल द्वारा दिए गए ज्ञापन में जो मांगें की गयी हैं उसमें कहा गया है कि ईंधन अधिभार लगाने से पूर्व पूर्व नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली गई। बिजली के औद्योगिक व घरेलू बिलों में पूर्व में ही फिक्स चार्ज लगाए जा रहे है। वाणिज्य ( एलएमवी -2) बिलों में फिक्स चार्ज व मिनिमम चार्ज दोनों लगाए जाते हैं। घरेलू, वाणिज्य व औद्योगिक बिलों में 7.5′ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी जोड़ी जा रही है। नियामक आयोग के द्वारा प्रत्येक वर्ष बिजली के उत्पादन व खर्चों की समीक्षा कर आम पब्लिक से सुनवाई करने के बाद बिजली की दरों का पुन: निर्धारण किया जाता है इसलिए बीच सेशन में अनावश्यक रूप से बिजली की दरों में बढ़ोतरी करने का कोई औचित्य नहीं है। अचानक की गई बढ़ोतरी से एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी तथा इसके प्रभाव से बढ़ाने वाली महंगाई से आम जनता प्रभावित होगी तथा अचानक कि गई बढ़ोतरी से उत्तर प्रदेश का उद्योग व व्यापार प्रभावित होगा हमारे यंहा के व्यापार लागत बढ़ने से नष्ट हो जाएगा। लोकेश अग्रवाल ने कहा कि अनावश्यक रूप से ईंधन अधिभार के नाम पर बिजली के बिलों में की जा रही 10′ की बढ़ोतरी को समाप्त की जाए।
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