मेरठ। डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए दूध का उत्पादन बढ़ाने के साथ उत्पादन लागत पर नियंत्रण, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन आवश्यक है। भाकृअनुप-केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशुओं के चयन, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य देखभाल और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार मोहंती के निर्देशन में इंडियन डेयरी एसोसिएशन, नॉर्थ जोन एवं वेस्टर्न उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का विषय ‘आत्मनिर्भरता से उद्यमिता तक: डेयरी को एक लाभदायक व्यवसाय में बदलना था। इसका उद्देश्य किसानों और डेयरी उद्यमियों को वैज्ञानिक तकनीकों तथा कुशल प्रबंधन के माध्यम से आय बढ़ाने के लिए जागरूक करना रहा।
संसाधनों का समुचित उपयोग पर बल
आईडीए, नॉर्थ जोन एवं वेस्टर्न उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर के चेयरमैन डॉ. ए.के. त्रिपाठी ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण डेयरी की लाभप्रदता बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की नंद बाबा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए डेयरी क्षेत्र के विकास में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। आईडीए के सेक्रेटरी जनरल हरिओम गुलाटी ने अच्छी नस्ल, संतुलित आहार, उचित रखरखाव और नियमित पशु स्वास्थ्य देखभाल को सफल डेयरी व्यवसाय का आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा किसानों, उद्यमियों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय से दुग्ध उत्पादन और आय में सुधार संभव है। आनंदा डेयरी के सीएमडी आर.एस. दीक्षित ने पशुओं की उत्पादन क्षमता के अनुरूप पोषण और प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक नियोजन से डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सकता है। आईडीए के अध्यक्ष सुधीर कुमार सिंह ने दूध की गुणवत्ता, आर्थिक व्यवहार्यता तथा किसान और उपभोक्ता, दोनों के हितों को ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई।
तकनीकी सत्र में पंकज शर्मा ने ‘दूध से कमाई, समझदारी से समृद्धि डेयरी उद्यमिता की नई राहÓ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने डेयरी व्यवसाय में लागत के बेहतर प्रबंधन और उद्यमिता की संभावनाओं पर चर्चा की। पीसीडीएफ के सेवानिवृत्त प्रबंधक डॉ. प्रमोद कुमार ने कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम में सुधारात्मक उपायों की जानकारी दी। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव रंजन कुमार ने डेयरी फार्म के अपशिष्ट का मूल्यवर्धित उत्पादों में उपयोग करने के अभिनव दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। उन्होंने चक्रीय और लाभदायक मूल्य शृंखला विकसित करने में अपशिष्ट प्रबंधन की उपयोगिता समझाई। किसान संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ डेयरी व्यवसाय से जुड़े प्रश्नों और व्यावहारिक समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. मानव सहित डेयरी क्षेत्र के विशेषज्ञ, किसान और उद्यमी उपस्थित रहे। मंच संचालन सुश्री निवेदिता दुबे ने किया। अंत में टी.टी. रेड्डी ने अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समन्वय केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.के. वर्मा ने किया।
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