राहत का इंतजार करने वालों के लिए बुरी खबर सुनवाई में राहत का कोई जिक्र तक नहीं, केवल और केवल ध्वस्तीकरण की बात
मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट वालों के लिए सोमवार को अमंगलकारी खबर आयी है। सुप्रीमकोर्ट से जिस राहत की आस लगाए बैठे थे वो नहीं मिली है। राहत को ना कह दिया गया है इतना ही नहीं यहां तक आदेश दिए गए हैं कि जो बाकि हैं उनको भी गिराया जाए, अवैध निर्माण चाहे 25 साल को या फिर सौ साल का सबको गिराना होगा। कोर्ट ने दो टूक कहा कि किसी भी दशा में अवैध निर्माण मंजूर नहीं। कोर्ट में मौजूद सरकार के अफसरों को ध्वस्तीकरण में किसी प्रकार की हिचक ना करने की हिदायत दी गयी है। जो अवैध है वह अवैध ही रहेगा चाहे 10 साल हो चाहे 50 साल हो चाहे 100 साल पुराना ही क्यों ना हो। इस मौके पर मौजूद प्रदेश के आवास आयुक्त पी गुरु प्रसाद को साफ कहा है कि अति शीघ्र कार्रवाई करो और किसी भी प्रकार की हिचकी चाहत मत करना यह तो केवल शुरुआत है हमें बहुत काम करना है। यह केवल शुरूआत है कोर्ट के इन अल्फाजो का व्यापक मतलब समझा जाना चाहिए.. मसलन आज मेरा गिर रहा है कल तेरी बारी है परसो उसकी यदि अवैध का तमगा अफसरों ने लगा दिया है तो फिर बचाने वाला कोई नहीं.. सरकार से उम्मीद की बात करना तो बेमाने हैं.. सरकार के अफसर लगातार अलल एलान कह रहे हैं कि सुप्रीमकोर्ट के आदेशों का अक्षरत: पालन होगा, यानि अवैध तो गिरेगा जरूर इसमें इफ बद की कोई गुंजाइश ही नहीं.. गेंद अब आवंटियों जो आंदोलन कर रहे थे उनके पाले हैं कि अब क्या करना है.. कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। यह भी सुनने में आया है कि जिस जनहित याचिका को लेकर उम्मीद बंधी थी उसको तो कंसीडर ही नहीं किया गया।
धरने का 172वां दिन
आवास विकास की ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयों के खिलाफ महिलाओं के धरने का आज 172वां दिन है। आज सुबह से तमाम लोग सुप्रीमकोर्ट में होने वाली सुनवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। दो बजे सुनवाई शुरू हुई और जो क्या कहा गया इसकी जानकारी होते होते तीन बज गए। महिलाओं और व्यापारियों का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो ना सका। अब कई व्यापारियों ने कह रहे हैं कि यदि निर्णय से राहत नहीं है अब आंदोलन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उनमें इस बात की भी नाराजगी है कि सीएम योगी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मेरठ आए और उनसे मिलने के लिए शिद्दत से कोई कोशिश नहीं की गयी। मिल सकते थे या कोशिश कर सकते थे मसलन जिनके भाजपा में ऊपर तक कनेक्शन हैं उन्होंने मुंह बंद रखे और जिनको मिलने की दरकार थी वो केवल सोशल मीडिया तक महफूज होकर कर गए। सोशल मीडिया या ग्रुप से बाहर नहीं निकल सके। सीएम योगी से अपनी बात मजबूती से रखने का जो मौका आज मिला था वो भी गवां दिया। हालांकि कुछ का कहना है कि अफसर किसी भी कीमत पर सीएम तक पहुंचने ही नहीं देते। हाउस अरेस्ट कर लिया जाता।
सभी चालिस प्रॉपर्टी का ध्वस्तीकरण तय
कोर्ट के आज के आदेश के बाद अब इतना तो साफ हो गया है कि अफसरों ने जो छह वाला खेल किया था वो कोर्ट के सामने बेनकाब हो गया, ध्वस्तीकरण के आदेश सभी 44 संपत्तियों के लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास एवं विकास परिषद ने आठ अप्रैल को 44 संपत्तियां सील की थीं। परिषद की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि ये संपत्तियां आवासीय हैं और इनमें पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके बाद 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने सभी 44 संपत्तियों को ध्वस्त करने के आदेश दिए। इसके बाद परिषद ने संपत्तियों की सील खोलकर सर्वे किया और संपत्ति स्वामियों को 15 दिन में इन्हें ध्वस्त करने के नोटिस जारी किए। 16 सितंबर को भारी पुलिस फोर्स के साथ छह निर्माणों पर कार्रवाई की। बताया गया कि इन छह निर्माणों के आवासीय मानचित्र भी नहीं थे। आवंटियों ने इन निर्माणों में किए गए अनधिकृत निर्माण को भी नहीं हटाया था।
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